मारांग बुरू, जल-जंगल-जमीन और परंपराओं के संरक्षण का संकल्प लें : कल्पना सोरेन रिपोर्ट _ इरफान अंसारी, राँची, झारखंड। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज की पहचान, धर्म, संस्कृति और पूजा-पद्धति प्रकृति से गहराई से जुड़ी है। आदिवासी समाज इस धरती के सबसे प्राचीन समुदायों में से एक है। इसकी मूल पहचान और जीवन-दर्शन को समझना बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज का धर्म प्रकृति के साथ साझा अस्तित्व, सम्मान और समरसता पर आधारित है। धरती, जंगल, पहाड़, नदियां और समस्त जीव-जगत उसकी आस्था का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि समाज को अपनी भाषा, संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक जीवन-पद्धति पर गर्व करना चाहिए तथा इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना चाहिए। वहीं, विधायक कल्पना सोरेन ने आदिवासी समाज से मारांग बुरू, जल-जंगल-जमीन और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपनी ऐतिहासिक पहचान और गौरवशाली विरासत का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है।
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