रिपोर्ट _ इरफान अंसारी, राँची, राॅंची। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन बुढ़मू प्रखंड में एक गरीब परिवार की परेशानी सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रही है। यहां एक परिवार का मकान बारिश के कारण जर्जर होकर गिर गया, पीड़ित परिवार ने पंचायत की मुखिया के माध्यम से 13 सितंबर 2026 को अंचलाधिकारी के नाम आवेदन भी सौंपा, लेकिन करीब दो महीने बीत जाने के बावजूद परिवार को न तो कोई सहायता राशि मिली और न ही पक्के मकान की कोई उम्मीद दिखाई दे रही है। मामला बुढ़मू मुस्लिम मोहल्ला निवासी 42 वर्षीय नौशाद अंसारी और उनकी 35 वर्षीय पत्नी बेबी खातून का है। बेबी खातून ने मीडिया से बातचीत में बताई कि सितंबर 2026 में अत्यधिक बारिश के कारण उनका घर पूरी तरह जर्जर होकर गिर गया था। इसके बाद उनके पति नौशाद अंसारी ने बुढ़मू पंचायत की मुखिया गंगोत्री देवी से मुलाकात कर अपनी परेशानी बताई और आवेदन सौंपा था। मुखिया ने भी परिवार को मदद का भरोसा दिलाते हुए उसी दिन 13 सितंबर को नौशाद अंसारी और उनकी पत्नी को साथ लेकर अंचलाधिकारी के नाम लिखित आवेदन सौंपा था। आवेदन में परिवार के लिए पक्के मकान और उचित मुआवजे की मांग की गई थी। लेकिन पीड़ित परिवार का आरोप है कि आवेदन दिए करीब दो महीने होने को हैं, इसके बावजूद अंचल कार्यालय की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। न तो परिवार को कोई आर्थिक सहायता मिली और न ही आवास उपलब्ध कराने की दिशा में कोई जानकारी दी गई। पीड़ित दंपती का कहना है कि आवेदन देने के बाद से अब तक कोई जनप्रतिनिधि भी उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा है। नौशाद अंसारी और बेबी खातून ने गुरुवार, 5 नवंबर को मीडिया से भावुक बातचीत करते हुए बताया कि वे आज भी उसी क्षतिग्रस्त मकान में रहने को मजबूर हैं। मकान का जो हिस्सा बचा हुआ है, उसकी दीवारों में भी दरारें पड़ चुकी हैं। ऐसे में उन्हें हमेशा घर के और क्षतिग्रस्त होने का डर सताता रहता है। दंपती के दो बच्चे हैं। इनमें करीब 16 वर्षीय बेटा और 14 वर्षीय बेटी शामिल हैं, जो स्कूल में पढ़ाई करते हैं। परिवार का कहना है कि घर की खराब स्थिति और असुरक्षा के माहौल में बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। एक तरफ बच्चों के भविष्य की चिंता है, तो दूसरी तरफ सिर पर सुरक्षित छत नहीं है।
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