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GIRIDIH : आदिवासी समाज को विशिष्ट सामाजिक अधिकार, भारतीय संविधान में भी दी गई है मान्यता : हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री

MANINDAR MANISH • Reporter • East Singhbhum • 🕐 05 Nov 2026, 08:44 PM

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन गिरिडीह के पीरटांड़ स्थित मधुबन थाना मैदान में आयोजित 'मारांग बुरू धोरोमगाड़ महासम्मेलन' में हुए सम्मिलित मरांग बुरू धोरोमगाड़ का संरक्षण एवं देखभाल हम सबों की नैतिक जिम्मेदारी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए सामूहिक सहभागिता और आपसी सहयोग आवश्यक गिरिडीह, झारखंड। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन आज गिरिडीह जिले के पीरटांड़ स्थित मधुबन थाना मैदान में आयोजित 'मारांग बुरू धोरोमगाड़ महासम्मेलन' में सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री ने वहां उपस्थित जन-समुदाय को संताली भाषा में संबोधित करते हुए आदिवासी समाज को और मजबूती प्रदान करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को विशिष्ट सामाजिक अधिकार प्राप्त है, जिन्हें भारतीय संविधान में भी मान्यता दी गई है। उन्होंने कहा कि देश में कई ऐसे क्षेत्र हैं , जहां आदिवासी समाज की सहमति और अनुमति के बिना कोई भी कार्य संपन्न नहीं किया जा सकता। उन्होंने महासम्मेलन में उपस्थित जनसमूह को शुभकामनाएं देते हुए समाज को संगठित, सशक्त और प्रगतिशील बनाने की दिशा में किए जा रहे सार्थक प्रयासों की सराहना की। साथ ही, समाज के सर्वांगीण विकास के लिए सामूहिक सहभागिता और आपसी सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि मरांग बुरू धोरोमगाड़ का संरक्षण आवश्यक है। उनकी देखभाल कैसे करना है, उसके लिए हम सभी हैं। आदिवासी समाज देश का सबसे पुराना समाज मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज देश का सबसे पुराना समाज है। समाज की जड़ मजबूत है, परंतु शाखाएं भिन्न हो गई है। वर्तमान समय में समाज के कुछ लोग हिन्दू मानते हैं, तो कुछ लोग सरना कहते हैं। लोग जनजातीय भाषा भी बोल रहे हैं और हिन्दी भी। हमारे पूर्वज जंगलों में वास करते हैं। जंगल से रोजगार मिलता है। जंगल हमारे लिए भगवान के समान है। अपनी पारंपरा व रीति- रिवाज को समझें युवा मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पिताजी दिशोम गुरू शिबू सोरेन और पूजनीय माता रूपी सोरेन का निधन हो गया है। पारंपरिक विधि-विधान व रीति रिवाज के साथ उनका द्वादशकर्म संपन्न किया गया। उन्होंने युवाओं से भी आह्वान किया कि उन्हें अपनी परंपरा, रीति- रिवाज को समझना चाहिए। साथ ही अपनी समाज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से अवगत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज दुनिया इतनी तरक्की

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