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RANCHI : राज्य के पौने दो लाख कर्मचारियों और उनके परिवारों को मिलेगी वित्तीय सुरक्षा

MANINDAR MANISH • Reporter • East Singhbhum • 🕐 04 Nov 2026, 06:27 PM

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की मौजूदगी में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के साथ हुआ MoU ₹2 करोड़ तक का एयर एक्सीडेंट कवर, ₹20 लाख का निःशुल्क टर्म इंश्योरेंस और ₹1 लाख तक का हेल्थ इंश्योरेंस मिलेगा रांची, झारखंड। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन झारखंड सरकार और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के बीच राज्य सरकार के सैलरी पैकेज (SGSP) को लेकर आयोजित समझौता ज्ञापन (MoU) कार्यक्रम में शामिल हुए। इस समझौते का उद्देश्य राज्य सरकार के कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के साथ कर्मचारी कल्याण, वित्तीय सशक्तीकरण और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देना है। इस MoU के तहत राज्य सरकार के कर्मचारियों को कई महत्वपूर्ण वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें ₹2 करोड़ तक का एयर एक्सीडेंट इंश्योरेंस कवर, ₹20 लाख तक का निःशुल्क टर्म इंश्योरेंस, ₹1 लाख तक का हेल्थ इंश्योरेंस, निःशुल्क डेबिट कार्ड तथा अन्य लाइफस्टाइल सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा जीरो QAB की सुविधा भी मिलेगी। इन प्रावधानों से कर्मचारियों को आकस्मिक परिस्थितियों में आर्थिक सुरक्षा और भविष्य के लिए अतिरिक्त संबल प्राप्त होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार ने भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के साथ समझौता किया है। इन समझौतों के माध्यम से राज्य के लगभग पौने दो लाख कर्मचारियों और उनके परिवारों को विपत्ति के समय वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बैंकों की भूमिका को केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि बैंक झारखंड के पारंपरिक सामाजिक ताने-बाने को संभालने वाले लोगों, आम जनता, विशेषकर गरीब और पिछड़े वर्ग के आर्थिक सशक्तीकरण में भी अपनी जिम्मेदारी निभाएं। बैंकों को नियमों के दायरे में रहते हुए जरूरतमंदों तक वित्तीय सुविधाएं और ऋण उपलब्ध कराने के लिए सक्रिय पहल करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं की वास्तविक स्थिति पर भी ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने कहा कि कागजी आंकड़े भले ही बेहतर नजर आते हों, लेकिन ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के दौरे के दौरान यह महसूस होता है कि मूलवासी और आम जनता को बैंकों से अपेक्षित सहयोग एवं ऋण उपलब्ध कराने में अभी भी कई क

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