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सफेद सोने की काली 'तस्करी': कोल्हुई में किसानों की छाती पर मूंग दल, ट्यूब के सहारे नेपाल बह रही 'खाद की गंगा'

baitullah khan • District Crime reporter • Maharajganj • 🕐 04 Nov 2026, 03:42 PM

*सफेद सोने की काली 'तस्करी': कोल्हुई में किसानों की छाती पर मूंग दल, ट्यूब के सहारे नेपाल बह रही 'खाद की गंगा'* खाकी की 'शह' पर सीमावर्ती गांव बने सिंडिकेट के महफूज ठिकाने प्राइवेट दुकानदारों की जुगलबंदी से डंप हो रहा उर्वरक* महराजगंज। सरहद पर पहरेदारी और चौकसी के लंबे चौड़े दावों के बीच महराजगंज जिले के कोल्हुई थाना क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। एक तरफ जिले का बेबस अन्नदाता रबी की फसलों में डालने के लिए एक एक बोरी खाद के वास्ते सुबह से शाम तक साधन सहकारी समितियों और दुकानों के चक्कर काट काटकर लाठियां खाने को मजबूर है वहीं दूसरी तरफ कोल्हुई पुलिस की मेहरबानी से भारतीय किसानों के हक का कीमती उर्वरक धड़ल्ले से नेपाल भेजा जा रहा है। क्षेत्र के ककरहवा और बगही घाट के रास्तों से कंबाइन मशीन के बड़े बड़े ट्यूबों पर खाद की बोरियां लादकर जलमार्ग से सीमा पार कराने का एक सनसनीखेज वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दोपहर 12 बजे के कड़े उजाले में सरेआम चल रहा यह अवैध खेल स्थानीय पुलिस की मुस्तैदी और गश्त के दावों को खुली चुनौती दे रहा है। किसानों के हक पर डकैती भारत सरकार देश के गरीब और सीमांत किसानों को कर्ज और भारी लागत के बोझ से बचाने के लिए अरबों रुपये की सब्सिडी देकर बेहद रियायती दरों पर खाद उपलब्ध कराती है। लेकिन कोल्हुई क्षेत्र में सक्रिय तस्कर इस सरकारी मदद और अन्नदाता के हक पर डकैती डालकर अपनी तिजोरियां भरने में जुटे हैं। स्थानीय किसानों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब वे अपनी फसलों के लिए खाद खरीदने जाते हैं तो उन्हें घंटों लाइनों में लगने के बाद भी अधिक रकम देने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ता है जबकि सीमा पर तस्कर बेखौफ होकर खुलेआम दिन के उजाले में नेपाल में ऊंचे दामों पर भारतीय खाद की खेप खपा रहे हैं। सरहदी गांव बने महफूज ठिकाने प्राइवेट दुकानों का 'नेटवर्क' विश्वस्त सूत्रों और वायरल वीडियो से मिली जानकारी के अनुसार इस पूरे काले कारोबार की जड़ें सीमावर्ती इलाकों में काफी गहरी जम चुकी हैं। कोल्हुई थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कई सरहदी गांवों को तस्करों ने अपना सुरक्षित ठिकाना और तस्करी का मुख्य अड्डा बना रखा है। इन गांवों में सिंडिकेट का जाल इस कदर फैला हैकि बॉर्डर क्षेत्र में संचालित कुछ प्राइवेट?

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