प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में चार दिवसीय भारत नवीकरणीय ऊर्जा सम्मेलन और प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का विषय है- निवेश करें, नवाचार करें, प्रेरित करें। प्रधानमंत्री ने प्रदर्शनी में विभिन्न स्टॉलों का दौरा किया और प्रदर्शकों से बातचीत की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था ने कोविड-19 महामारी से लेकर पश्चिम एशिया संकट तक, कई अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना किया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया का संकट अब भी जारी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह 140 करोड़ भारतीयों के लिए गर्व की बात है कि देश ने इन वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया है। उन्होंने कहा कि इन संकटों के बावजूद, भारत ने अपनी उच्च विकास दर को बनाए रखा है। श्री मोदी ने कहा कि इस वैश्विक संकट ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा सीधे तौर पर आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा का भविष्य स्वच्छ ऊर्जा में निहित है। श्री मोदी ने कहा कि आज भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि भारत 2030 तक 500 गीगावाट के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में मजबूती से काम कर रहा है। श्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि जीवाश्म ईंधन के भंडार सीमित हैं, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा की संभावनाएं असीमित हैं, और हर क्षेत्र तथा देश इससे लाभ उठा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सौर और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है। उन्होंने कहा कि सौर क्रांति का यह नया चरण केवल इसे अपनाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह नवाचार पर भी निर्भर करता है। श्री मोदी ने बताया कि पिछले 12 वर्ष में 44 हजार से अधिक सरकारी इमारतों को सौर ऊर्जा से जोड़ा गया है, जिससे सालाना लगभग सात सौ करोड़ रुपये की बचत हो रही है। प्रधानमंत्री ने हर सरकारी इमारत, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और स्ट्रीट-लाइटिंग सिस्टम को सौर ऊर्जा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। श्री मोदी ने कहा कि देश भर के किसान भी ‘पीएम-कुसुम’ योजना का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से 30 लाख से अधिक किसानों को सौर ऊर्जा से संचालित सि
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