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हरमनप्रीत कौर (नाबाद 171) की तूफानी पारी के दम पर भारत ने आईसीसी महिला विश्व कप के दूसरे सेमीफाइनल मैच में गुरुवार को मौजूदा विजेता आस्ट्रेलिया 36 रनों से हरा दिया. जीत के लिए भारतीय टीम ने 282 रनों की विशाल चुनौती रखी थी, जिसके जवाब ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 39.4 ओवरों में 244 रनों पर ढेर हो गई.

इससे पहले भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 42 ओवरों में चार विकेट खोकर 281 रन बनाए. जवाब में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 37 ओवरों में 9 विकेट के नुकसान पर 218 रन बना लिए हैं. बारिश की वजह से 42 ओवरों का मैच कर दिया गया है.

बारिश के कारण मैच देरी से शुरू हुआ इसलिए अंपायरों ने ओवरों की संख्या 50 से घटाकर 42 कर दी.

भारत को इस स्कोर तक पहुंचाने में हरमनप्रीत का अहम योगदान रहा. उन्होंने अपनी पारी में सिर्फ 115 गेंदों का सामना करते हुए 20 चौके और सात छक्के लगाए और तीन अहम साझेदारी करते हुए टीम को विशाल स्कोर प्रदान किया. यह हरमनप्रीत का वनडे में सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर भी है.

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम अच्छी शुरुआत नहीं मिली. स्मृति मंधाना ने बल्ले से एक बार फिर नाकाम रहीं. वह पहले ही ओवर की आखिरी गेंद पर छह रनों के कुल स्कोर पर आउट हो गईं.

पूनम राउत (14) भी कुछ खास नहीं कर पाईं और 35 के कुल स्कोर पर पवेलियन लौट गईं. इसके बाद हरमनप्रीत और कप्तान मिताली राज ने टीम को संभाला और तीसरे विकेट के लिए 66 रनों की साझेदारी करते हुए सौ का आंकड़ा पार कराया.

 

मिताली 101 के कुल स्कोर पर आउट होकर पवेलियन लौट गईं. दूसरे छोर पर खड़ी हरमनप्रीत को इसके बाद दीप्ति शर्मा का साथ मिला. दोनों ने मिलकर चौथे विकेट के लिए 137 रन जोड़े.

इस जोड़ी ने धीमी शुरुआत के बाद लय पकड़ी और फिर टीम को मजबूत लक्ष्य प्रदान किया. हालांकि इस दौरान हरमनप्रीत तेजी से रन बनाती दिखीं जबकि दीप्ति ने उनका अच्छा साथ दिया और स्ट्राइक रोटेट करती रहीं. उन्होंने 35 गेंदों में 25 रन बनाए और सिर्फ एक चौका मारा.

इस जोड़ी को एलिस विलानी ने 238 के कुल स्कोर पर तोड़ा. इसके बाद वेदा कृष्णामूर्ति ने हरमनप्रीत का अच्छा साथ दिया. इस जोड़ी ने चार ओवरों के बल्लेबाजी पावरप्ले में 57 रन जोड़ आस्ट्रेलिया को विशाल लक्ष्य दिया.

आस्ट्रेलिया की तरफ से मेगन शट, एशेल गार्डनर, कर्स्टन बीम्स, एलिस विलानी ने एक-एक विकेट लिया.

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रविवार को बीसीसीआई की एक बैठक में अनुराग ठाकुर को सर्वसम्मति से बीसीसीआई का नया अध्यक्ष चुन लिया गया है.
इससे पहले वो भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सचिव थे.
अनुराग ठाकुर के बोर्ड अध्यक्ष बनने के बाद, अजय शिर्के को बीसीसीआई का नया सचिव नियुक्त किया गया.
बीसीसीआई ने एक प्रेस रिलीज़ में बताया था कि उसे इस पद के लिए सिर्फ़ अनुराग ठाकुर की ओर से ही नामांकन मिला था.
बोर्ड के मुताबिक़ अनुराग ठाकुर का नामांकन पूर्वी ज़ोन के सभी छह पूर्ण सदस्यों की ओर से हुआ है.
इससे पहले शशांक मनोहर के त्यागपत्र के कारण बीसीसीआई का अध्यक्ष पद ख़ाली हो गया था.
शशांक मनोहर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के चेयरमैन बनाए गए हैं.
अनुराग ठाकुर साल 2017 तक बीसीसीआई के अध्यक्ष रहेंगे.

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रियो ओलंपिक से पहले भारत में जिमनास्टिक की पहचान न के बराबर थी लेकिन खेलों का महाकुंभ समाप्त होते ही सबकी जुबां पर जिमनास्टिक का नाम आ चुका था और इस खेल को नयी पहचान दिलाने का श्रेय जाता है त्रिपुरा की दीपा करमाकर को।

ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर पहली बार उतरना ही खिलाड़ी के लिये विशेष उपलब्धि होती है लेकिन बहुत कम खिलाड़ी ऐसे होते हैं जो अपना नाम और मुकाम दोनों बना जाते हैं। यह कहावत रियो ओलंपिक में त्रिपुरा की जिमनास्ट दीपा पर खरी उतरती है जो ओलंपिक में अपने प्रदर्शन से पूरे देश की लाडली बन गयीं।

रियो ओलंपिक के बाद जिमनास्टिक, प्रोदुनोवा वॉल्ट और दीपा एक दूसरे के पूरक बन गये हैं। ओलंपिक खेलों के लिये क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला जिमनास्ट होने का गौरव हासिल करने वाली दीपा रियो में अपनी वॉल्ट स्पर्धा में पदक पाने से चूक गईं लेकिन उन्होंने चौथा स्थान हासिल कर 125 करोड़ देशवासियों का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया। 

दीपा से पहले देश में जिमनास्टिक को कभी गौर से नहीं देखा जाता था लेकिन दीपा के प्रदर्शन के बाद जिमनास्टिक आकर्षण का केन्द्र बन गया है। भारत रत्न सचिन तेंदुलकर, बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन, निशानेबाज अभिनव भबद्रा और क्रिकेटर वीरेन्द्र सहवाग जैसी हस्तियों ने दीपा की कामयाबी को सलाम किया।

दीपा ने इस प्रदर्शन से अपना नाम ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करने वाली महिला खिलाड़यिों पीटी ऊषा, कर्णम मल्लेश्वरी, अंजलि भागवत, सायना नेहवाल, सानिया मिर्जा जैसी खिलाड़यिों में शुमार करा लिया। दीपा ने इसके साथ ही आमतौर पर उपेक्षित रहने वाले पूर्वोत्तर क्षेत्र को भी गौरवान्वित किया। दीपा ने अपने इस प्रदर्शन का सारा श्रेय कोच बिसेश्वर नंदी को देते हुये कहा था कि वह उनके लिये भगवान की तरह हैं।

उनके इस प्रदर्शन ने उन्हें देश का सर्वाेच्च राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार और नंदी को द्रोणाचार्य पुरस्कार दिला दिया। दीपा की यह उपलब्धि इसलिये भी मायने रखती है क्योंकि बाकी अन्य भारतीय एथलीटों की तरह दीपा ने विदेशों में जाकर महंगे और विदेशी कोचों से कोई ट्रेभनग नहीं ली है।

वर्ष 2014 राष्ट्रमंडल खेलों की कांस्य पदक विजेता और इस वर्ष विश्व चैंपियनशिप में पांचवें स्थान पर रहीं दीपा के कोच नंदी ने विदेश में ट्रेभनग लेने से इंकार कर दिया था। उन्होंने कहा था, दीपा जब भारत में ट्रेभनग से क्वालीफाई कर सकती है तो अब विदेश जाने की जरूरत क्या है।

23 वर्षीय दीपा ने देश की लड़कियों को अपने संदेश में कहा था, मेरा संदेश देश की सभी लड़कियों को है कि महिलाएं किसी चीज में पीछे नहीं है और मेहनत से वह सबकुछ हासिल कर सकती हैं।

दीपा रियो ओलंपिक की जिमास्टिक की वॉल्ट स्पर्धा में चौथा स्थान हासिल कर पदक पाने से चूक गई थीं लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से भारत के खेल इतिहास में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज करा लिया। दीपा ओलंपिक में 52 वर्षों में उतरने वाली पहली भारतीय जिमनास्ट और रियो के लिये क्वालीफाई करने वाली एकमात्र जिमनास्ट थीं।

त्रिपुरा की दीपा ने 15.066 के औसत स्कोर के साथ चौथा स्थान हासिल किया। उन्होंने अपने मुकाबले के बाद कहा जिन तीन खिलाड़यिों को पदक मिला वे निश्चित तौर पर मुझसे बेहतर थीं। लेकिन यह मेरे पहले ओलंपिक हैं और मैं अपने अनुभव से खुश हूं। मैंने जो कुछ भी ट्रेभनग में सीखा था उसे लागू किया। लेकिन देश को पदक नहीं दिला पाने से मैं दुखी हूं।

23 वर्षीय दीपा ने लेकिन विश्वास जताया था कि वह अगले ओलंपिक में पदक जरूर लेकर आएंगी। उन्होंने कहा मैं भविष्य में बेहतर करने की कोशिश करती रहूंगी और 2020 के टोक्यो ओलंपिक में अपने देश के लिये पदक लाने की पूरी कोशिश करूंगी। जीतना और हारना खेल का हिस्सा होता है।

उन्होंने कहा था मैं प्रोदुनोवा में अच्छा करने को लेकर आश्वस्त थी। मैं अपने दोनों वोल्ट अच्छे से करना चाहती थी। मैं इस बार रजत या कांस्य की ही सोच रही थी लेकिन अगली बार तो मेरा लक्ष्य सिर्फ स्वर्ण ही होगा और फिर शायद मुझे रजत या कांस्य ही मिल जाए। लेकिन मैं पूरे देश की मेरे लिये दिये गये समर्थन की आभारी हूं।

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विराट कोहली की कप्तानी पारी के दम पर रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने आईपीएल-9 में प्लेऑफ का टिकट हासिल कर लिया है.
बैंगलोर की टीम ने रायपुर में खेले गए आखिरी लीग मैच में डेल्ही डेयरडेविल्स को 6 विकेट से मात दी.
इस जीत के साथ बैंगलोर ने अपने खाते में 16 अंक जुटा लिए और रनरेट के आधार पर अंकतालिका में दूसरा स्थान हासिल कर लिया. अब पहले क्वालिफायर में बैंगलोर का मुक़ाबला मंगलवार को गुजरात लॉयन्स से होगा.
गुजरात की टीम ने 18 अंकों के साथ अंकतालिका में पहला स्थान हासिल किया है.
डेयरडेविल्स ने बैंगलोर को जीत के लिए 139 रन का लक्ष्य दिया था जो उसने 4 विकेट गंवाकर 18.1 ओवर में हासिल कर लिया.
बैंगलोर की शुरुआत खराब रही. क्रिस गेल एक और एबी डिविलियर्स छह रन बनाकर पैवेलियन लौट गए लेकिन कप्तान विराट कोहली ने डेयरडेविल्स की उम्मीदों पर पानी फेर दिया.
कोहली ने 45 गेंदों में नाबाद 54 रन बनाकर टीम को जीत दिला दी.

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टीम इंडिया के वनडे कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कहा है कि उनकी 15 महीने की बेटी जीवा उन्हें अब भी नहीं पहचानती। जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन टी20 मैचों की सीरीज खेलने के बाद धोनी अगली सीरीज अक्टूबर में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेलेंगे। यानी उनके पास फैमिली के साथ वक्त बिताने के लिए अब चार महीने का वक्त होगा। धोनी ने बुधवार को जिम्बॉव्बे पुलिस की बाइक पर भी सवारी का लुत्फ लिया।

- जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में क्लीन स्वीप करने के बाद पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन के दौरान धोनी ने मीडिया के सवालों के जवाब दिए।
- एक सवाल के जवाब में धोनी ने कहा, ''काफी लंबे वक्त के बाद मुझे आराम मिलने जा रहा है। मुझे नहीं लगता कि मेरी बेटी अब भी मुझे पहचानती होगी। अब मुझे उसे यह अहसास कराना होगा कि मैं उसका पापा हूं। बेटी और फैमिली के साथ वक्त बिताने का मौका मिलने वाला है।''
- बता दें कि धोनी की बेटी 15 महीने की है और उसका नाम उन्होंने जीवा रखा है।
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भारत के दिग्गज क्रिकेटर रहे सचिन तेंदुलकर को 21वीं सदी का 'सर्वश्रेष्ठ टेस्ट खिलाड़ी' चुना गया है.
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के एक ऑनलाइन पोल में सचिन को सबसे अधिक 23 प्रतिशत वोट मिले.
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की वेबसाइट के मुताबिक, "साल 2000 के बाद से 100 सर्वश्रेष्ठ टेस्ट खिलाड़ियों के लिए कराए गए इस ऑनलाइन पोल के वोटों की गिनती 10 दिन तक चली. बाद में पाठकों ने शीर्ष दस खिलाड़ियों पर चर्चा की.

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आईसीसी ने शुक्रवार को कहा कि पुरुष विश्व टी20 के साथ ही आयोजित किये गये 2016 महिला विश्व टी20 को केवल भारत में ही दो करोड़ 45 लाख दर्शकों ने देखा।


आईसीसी विज्ञप्ति में कहा गया है, 'आईसीसी क्रिकेट समिति को आईसीसी महिला समिति की अध्यक्ष क्लेर कोनोर से रिपोर्ट मिली जिसमें हाल में भारत में हुई आईसीसी महिला विश्व टी20 चैंपियनशिप के प्रभाव के बारे में बताया गया है।

इसमें दिखाया गया है कि महिला प्रतियोगिता को काफी समर्थन मिला और केवल भारत में ही दो करोड़ 45 लाख दर्शकों ने टीवी पर इसे देखा।' क्रिकेट समिति के अध्यक्ष अनिल कुंबले ने कहा, 'हमारी विभिन्न मसलों पर सकारात्मक चर्चा हुई और मैं सभी सदस्यों का उनके अमूल्य योगदान और इनपुट के लिये आभार व्यक्त करता हूं।'

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मीरपुर में शेर-ए-बांग्ला नेशनल स्टेडियम में खेले गए दूसरे एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में मेज़बान बांग्लादेश ने भारत को 6 विकेट से हराकर तीन मैचों की सिरीज़ को रविवार को ही अपने नाम कर लिया.
दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम में चारो तरफ लहराते बांग्लादेशी झंडों के बीच जीत के बाद जश्न का माहौल था.
इससे पहले बांग्लादेश ने कभी भी भारत से एकदिवसीय सिरीज़ नही जीती थी.
वैसे इस सिरीज़ के शुरू होने से पहले ही तमाम क्रिकेट विशेषज्ञ भारत को चेतावनी दे रहे थे कि वह इस बार बांग्लादेश से बचकर रहे.
पिछले दिनों पाकिस्तान को बांग्लादेश ने एकदिवसीय सिरीज़ में 3-0 से हराया था.ग्लादेश की जीत में उसके युवा तेज़ गेंदबाज़ मुस्तफिज़ुर रहमान का बड़ा योगदान रहा जिन्होंने दोनों मैचों में कुल मिलाकर 11 विकेट अपने नाम किए.
दरअसल वही दोनों टीमों में सबसे बड़ा अंतर साबित हुए.
पहले मैच में 79 रन से हार के साथ ही भारत का मनोबल कितना गिर चुका था इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने दूसरे मैच में तीन बदलाव कर दिए.
अजिंक्य रहाणे, उमेश यादव और मोहित शर्मा की जगह अंबाती रायडू, अक्षर पटेल और धवल कुलकर्णी को शामिल किया गया, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात रहा.साल 2014 में भारत ने तीन एकदिवसीय मैचों की सिरीज़ में बांग्लादेश को 2-0 से हराया था.
इससे पहले भारत विश्व कप के सेमीफाइनल में ज़रूर पहुंचा लेकिन विश्व कप से पहले ऑस्ट्रेलिया में खेली गई त्रिकोणीय एकदिवसीय सिरीज़ में भारत एक मैच भी नही जीत सका था. वहां तीसरी टीम इंग्लैंड थी.
वैसे बांग्लादेश ने अभी तक जिन मैचों में भारत को हराया है वह इतेफ़ाक़ से उसके लिए यादगार ही बन गए.जब बांग्लादेश ने साल 2012 में भारत को हराया था तो उस मैच में भारत के महान बल्लेबाज़ सचिन तेंदुलकर ने अपने अंतराष्ट्रीय क्रिकेट करियर का सौंवा शतक बनाते हुए 114 रन बनाए थे.
उस हार ने उनकी पार्टी ख़राब की थी.
इसके अलावा बांग्लादेश ने साल 2007 में वेस्ट इंडीज़ में आयोजित विश्व कप में पोर्ट ऑफ स्पेन में भारत को 5 विकेट से हराया था.
उसके बाद तो भारत टूर्नामेंट से ही बाहर हो गया था.बांग्लादेश को भारत के ख़िलाफ अपनी पहली जीत के लिए 16 साल और पहली सिरीज़ जीतने के लिए 27 साल लंबा इंतज़ार करना पड़ा है.
दोनों देशों के बीच पहला एकदिवसीय मैच साल 1988 में चटगांव में खेला गया था जिसे भारत ने 9 विकेट से जीता था.
बांग्लादेश ने भारत को पहली बार साल 2004 में ढाका में 15 रन से हराया था.
इसके अलावा बांग्लादेश ने पिछले मैच में भारत को 79 रन से हराया.
कमाल की बात है कि जिस टीम ने तीन मैच जीतने में 27 साल लगाए उसने न केवल चार दिनों में ही दूसरा मैच जीत लिया बल्कि चैंपियंस ट्रॉफी में खेलने की उम्मीदें भी पैदा कर ली है.

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ब्रेकिंग न्यूज :- यूपी के सीएम श्री योगी आदित्यनाथ माननीय मुख्यमंत्री जी माताओं - बहनों को उत्तर प्रदेश सरकार का तोहफा रक्षाबंधन के पावन अवसर पर परिवहन विभाग बसों में सभी महिलाओं की यात्रा होगी बिल्कुल मुफ्त यह सुविधा 6 अगस्त 2017 रात्रि 12 बजे से 7 अगस्त 2017 रात्रि 12 बजे तक प्रभावी रहेगी  सलमान खान - डिप्टी ब्यूरो चीफ़ - रामपुर 

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सुनील छेत्री

फ़ीफ़ा के 2018 विश्व कप क्वालिफ़ॉयर मैच में भारत मंगलवार को एक ऐसे देश से हार गया जो फ़ीफ़ा रैंकिंग में उससे 33 पायदान नीचे है.
भारत को 2-1 से हराने वाले गुवाम की आबादी दो लाख से भी कम है. इससे पहले भारत को ओमान ने भी 2-1 से हराया था.
गुवाम की फ़ीफ़ा रैंकिंग 174 है जबकि भारतीय फुटबॉल 141वें स्थान पर है.
दो बार एशियाई चैंपियन रहे भारत के इस दयनीय प्रदर्शन पर फ़ुटबॉल समीक्षक नोवी कपाड़िया का कहना है कि विश्व कप क्वालिफॉयर में भारत का इतना निराशाजनक प्रदर्शन पहले कभी नहीं रहा.
विश्व कप क्वालिफॉयर में भारत ने आज तक 40 में से केवल 9 मैच जीते हैं.
कहां पहुंच गया स्तर?

 

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