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शासन और सरकार के खिलाफ धरना का महा अभियान

 

 
शासन और सरकार के खिलाफ धरना का महा अभियान 
 एसके0 सोनी
साक्षरता कर्मी 10 जुलाई से शासन और सरकार के खिलाफ करेंगे धरना
 
रायबरेली। आदर्श साक्षरता कर्मी वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले साक्षरता कर्मियों के प्रतिनिधि मण्डल ने विधान मण्डल दल के उच्च सदन (विधान परिषद) के विलम्बित समिति के सभापति से मुलाकात कर मांगों के समर्थन में ज्ञापन सौंपा। जिसमें मुख्य रूप से ढाई वर्षों से बकाया मानदेय तथा नियमितीकरण की मांग उठाई। साथ ही कहा कि यदि जल्द ही मांगों का समाधान नहीं होता है तो सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश के सवा लाख साक्षरता कर्मी प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दिनांक 10 जुलाई से शासन और सरकार के खिलाफ धरना का महा अभियान छेड़ेंगे। सभापति ने कहा कि वह इस सम्बंध मे प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा को विधान परिषद में तलब कराकर समस्याओं के समाधान के लिए तत्कालिक कार्यवाही करायेंगे। आदर्श साक्षरता कर्मी वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष अकमल खान एवं प्रदेश सलाहकार विजय कुमार सिंह के नेतृत्व में साक्षरता कर्मियों ने माननीय सभापति को बताया कि साक्षर भारत मिशन के अन्तर्गत मात्र 2 हजार रू0 मासिक मानदेय पर प्रेरक ग्राम पंचायत स्तर पर लोक शिक्षा केन्द्रों के माध्यम से प्रौढ़ शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। इसी क्रम में सरकार की विभिन्न योजनाओं के प्रचार-प्रसार, विधिक साक्षरता, चुनावी साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, आपदा-प्रदान एवं नागरिक सुरक्षा, स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, पोलियो ड्यूटी के साथ ही बीएलओ के दायित्वों का निर्वहन भी यही लोग करते हैं। आए दिन विभिन्न विभागों द्वारा सर्वे का कार्य और पेंशनधारकों का सत्यापन भी प्रेरकों से ही कराया जाता है। फिर भी विगत ढाई सालों से साक्षरताकर्मियों का मानदेय बकाया है। जबकि भारत के अन्य प्रान्तों में साक्षरताकर्मियों का मानदेय नियमित भुगतान हो रहा है। प्रतिनिधि मण्डल ने साक्षरताकर्मियों की समस्याओं के लिये निदेशक साक्षरता श्री अवध नरेश शर्मा को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि यदि निदेशालय द्वारा समय पर प्रभावी कार्यवाही की जाती तो आज बकाया मानदेय की समस्या का शिकार न होना पड़ता। संगठन ने मांग की कि साक्षरताकर्मियों को कम से कम न्यूनतम वेतनमान जरूर दिलाया जाय। जिससे उनके परिवारों का भरण-पोषण भी होता रहे। क्योंकि भुखमरी की कगार पर पहुंच चुके भारत सरकार के साक्षरता कर्मियों की ऐसी दयनीय स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाती है। इसी क्रम में संगठन ने आकस्मिक/महिला प्रसूति अवकाश, नियमावली के अनुसार निर्धारित प्रबंधन/कार्यालय व्यय, मास मोबलाइजेशन एवं यात्रा भत्ता की धनराशि और कार्यालय को इन्फ्रास्ट्रक्चर से मजबूत कराने की भी मांग उठाई है। इस दौरान माननीय सभापति ने कहा कि वह जनहित की इस लड़ाई को सड़क से संसद तक पहुंचाएंगे और 11 जुलाई से शुरू हो रहे सत्र के दौरान साक्षरताकर्मियों की समस्याओं को विधान परिषद में भी उठाया जाएगा। साथ ही जल्द से जल्द बकाया मानदेय का शत्-प्रतिशत भुगतान हेतु प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा से प्रभावी कार्यवाही भी करायेंगे। इस अवसर पर मुख्य रूप से जिलाध्यक्ष अर्चना सिंह, जिला महामंत्री पवन यादव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पारसनाथ मिश्रा, कोषाध्यक्ष दिलीप सोनकर, उपाध्यक्ष किरन मिश्रा, सुरेश कुमार रावत, नारेन्द्र यादव, रामजी जायसवाल, अजमल खान, जावेद अहमद, अखिलेश यादव, किरन मिश्रा आदि उपस्थित रहे।

 


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