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युद्ध दुश्मन की धरती पर लड़ा जाये - ओ0पी0 यादव

 एस के सोनी 

span style="font-size: 14pt;">रायबरेली । सेन्ट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ समाजवादी नेता ओ0पी0 यादव ने प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी को फैक्स भेजकर मांग की है कि अब समय आ गया है युद्ध दुश्मन की धरती पर लड़ा जाय।  प्रधानमन्त्री को भेजे गये फैक्स में लिखा गया है कि विगत तीन वर्षो में देश के सैकड़ो जवान शहीद हो गये।  सैकड़ों जवान घायल हो गये।  इतने जवान किसी एक युद्ध जो भारत के साथ हुआ नहीं शहीद हुए।  जवानों की शहादत के लिए सरकार की नीतियाँ जिम्मेदार है। </span></p> <p><span style="font-size: 14pt;">    जवानों की शहदात के बाद रेड एलर्ट, कोर कमेटी की बैठक, आपात बैठकें बहुत हो चुकी।  अब आवश्यकता है कि ठोस रणनीति बनाकर दुश्मन को जवाब दिया जाय।  सेना में जवान जो देश की रक्षा के लिए तैनात है, उनमें अधिकांश मजदूर एवं किसान परिवार से है।  मध्यम आय वाले परिवार से अधिकांश जवान आते है।  किसी मिनीस्टर या ब्यूरोक्रेट का बेटा सेना में नहीं भर्ती होता है।  यही कारण है कि देश का नेतृत्व जवानों की शहदात को एक औपचारिकता के रूप में लेता है।  यदि उनके स्वयं के बेटे जवान के रूप में सरहद पर शहीद हुए होते तो शायद अब तक कोई ठोस रास्ता सरकार द्वारा निकाल लिया गया होता।  जिन परिवारों के बेटे सीमा पर शहीद होते हैं।  उन परिवारों का दुःख बाँटने एवं शहीदों की सच्ची श्रद्धाँजलि के लिए आवश्यक है कि दुश्मन को म"ँह-तोड़ जवाब दिया जाय। 

    पाकिस्तान द्वारा भेजे गये भाड़े के आंतकियों को नहीं बल्कि पाकिस्तान की सेना को सबक सिखाने की आवश्यकता है।  प्रधानमन्त्री जी अपने उस तेवर को याद करें, जब उन्होनें कहा था कि हम नवाज शरीफ को बिरयानी नहीं खिलायेंगे, बल्कि सबक सिखायेंगे।  अपना मौका आया तो रिश्तेदारी निभाने लगे, शपथ ग्रहण में आमंत्रण, विवाह समारोह में बिना आमंत्रण के शामिल होना, साड़ी व साल का विनिमय एक कूटनीतिक चाल तो सकती है, परन्तु इससे जवानों के खून का बदला नहीं मिल सकता है।  गुलशन में जब किसी गुल का कत्ले आम होता है, सबब कुछ भी हो बागवाँ बदनाम होता है।  आज जहाँ एक ओर चीन पाकिस्तान पर देश की सीमाएँ सुरक्षित नहीं है तो दूसरी ओर नक्सलवाद के कारण देश की आंतरिक सुरक्षा खतरे में है।  नक्सलियों के हमले में देश के सैकड़ों जवान शहीद हो चुके हैं।  हर हमले के बाद आपात बैठकें बुलायी जाती है। बैठकों का परिणाम तो नहीं दिखायी पड़ता अगला हमला अवश्य दिखाई देता है। श्री यादव ने कश्मीर के कुपावड़ा आर्मी कैम्प में शहीद हुए कैप्टन आयुष यादव व <span style="font-size: 12pt;">02</span> जवानों को श्रद्धाँजलि अर्पित की।  घायल जवानों के शीघ्र स्वस्थ होने की ईश्वर से कामना की।  श्री यादव ने कहा कि पठानकोट, उड़ी, नगरोटा के बाद यह हमला सुरक्षावालों के लिए नई चिंताये पैदा कर रहा है।  रक्षा ठिकानों की लम्बी पड़ताल के बाद बनी कम्पोज कमिटी ने पिछले साल बड़े मैप की रिपोर्ट दी थी।  लेकिन इस पर कोई खास काम नहीं हुआ।  कमिटी ने घेरे बन्दी में टूट की पहचान करने वाला सिस्टम लगाने पर जोर दिया था।  सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाने और उन्हें बेहतर हथियार देने की बात भी कही थी, लेकिन सभी प्रस्तावित कार्यवाहियाँ कागजों तक ही सीमित रह गयी।  समय की माँग है कि कार्यवाही कागजों में सिमट कर न रह जाए बल्कि धरातल पर दिखायी दे।</span></p> <p><span style="font-size: 14pt;">----------------------</span></p>"""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""


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