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मध्यप्रदेश के बालाघाट में हुए प्लेन क्रैश में मारी गई 24 साल की हिमानी कल्याणी को अंतिम विदाई दी गई

जब जवान बेटी के शव को मां ने पहनाया लाल जोड़ा, बाप का कलेजा फट गया
 और बाप के दिल पर क्या बीती होगी, जब उन्होंने जवान बेटी के शव को लाल जोड़ा पहनाकर विदा किया। नजारा जिसने भी देखा, उसका कलेजा फट गया।

मध्यप्रदेश के बालाघाट में हुए प्लेन क्रैश में मारी गई 24 साल की हिमानी कल्याणी को अंतिम विदाई दी गई तो हर कोई फूट फूट कर रोया। हिमानी की बुआ उसके लिए लाल और पीला सूट लेकर आई। जैसे ही यह शव पर डाला गया, चीख पुकार मच गई। पिता बेसुध हो गए और भाई चिल्लाने लगा। मां तो बस टकटकी लगाए बेटी को निहारती रही।

नागपुर के मेडिकल कॉलेज से ताबूत में आए हिमानी का शव जैसे ही घर पहुंचा तो महिलाओं का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। हिमानी का शव काफी जला होने के कारण ताबूत में रखे हुए शव पर ही सभी रस्में अदा की गई। इसके बाद हिमानी के शव को संस्कार के लिए गांव के शमशान घाट में ले जाया गया और छोटी सी उम्र में ही बेटी पंचतत्व में विलीन हो गई।

26 अप्रैल को एक एयरक्राफ्ट महाराष्ट्र में गोंदिया के बिरसी हवाई पट्टी से उड़ान भरकर मध्यप्रदेश के बालाघाट के खैरलांजी में बाणगंगा नदी में क्रैश हो गया था। हादसे में मृतक ट्रेनी कमर्शियल पायलट हिमानी कल्याण (24) का शव जैसे ही उसके पैतृक गांव कुटेल में पहुंचा तो हर किसी की आंखें नम हो गई। ग्रामीण बुधवार से शव के इंतजार में थे। वीरवार दोपहर को हिमानी का शव गांव में पहुंचा तो सन्नाटा पसर गया।

हर किसी की जुबान पर यही बात थी कि एक बेटी का सपना पूरा होने से पहले बेटी ही एक सपना बन गई। बता दें कि हिमानी ने 199 घंटे हवाई प्रशिक्षण के पूरे कर लिये थे, मात्र एक घंटा बाकी था, यह हिमानी के लिए ट्रेनिंग की आखिरी उड़ान थी, लेकिन लाइसेंस मिलने से एक घंटे पहले ही हिमानी की जिंदगी की आखिरी उड़ान बन गई।

वहीं, ट्रेनी पायलट के परिवार की महिलाएं रोते-रोते यही बोलती रही कि उनकी बेटी ने अभी तक नाम कमाया था। महिलाओं का कहना था कि बेटी हिमानी ने छोटी सी उम्र में बड़ा काम कर दिया। अगर एक घंटे की उड़ान सफलतापूर्वक पूरी हो जाती तो हिमानी पायलट बन जाती। जबकि भगवान को यह मंजूर नहीं था, बेटी की उड़ान पूरी होने से पहले बेटी जिंदगी से ही उड़ान भर गई।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के गोदियां के बिरसी हवाई पट्टी से बुधवार सुबह नौ बजे हिमानी कल्याण ने अपने ट्रेनर पायलेट रंजन गुप्ता के साथ उड़ान भरी थी। हिमानी महाराष्ट्र गोंदिया स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एविएशन ट्रेनिंग एंड मैनेजमेंट से कामर्शियल पायलट की दो साल से ट्रेनिंग ले रही थी और यह उसकी ट्रेनिंग की आखिरी उड़ान थी। इसके कुछ घंटे बाद ही उसे सर्टिफिकेट​ मिलने वाला था।

26 अप्रैल को ट्रेनिंग की अंतिम उड़ान के बाद हिमानी को पायलट का सर्टिफिकेट मिलने की खुशी में परिजन व रिश्तेदार जश्न की तैयारी में लगे थे, लेकिन हिमानी की मौत की खबर सुनकर जश्न की तैयारियां मातम में बदल गई। परिजनों का कहना है कि उनको अपनी बेटी पर नाज था कि वह पायलट बनने के बाद अपने गांव व जिले का नाम रोशन करेगी। हिमानी की मौत से परिवार के सभी सपने अधूरे रह गए।

हिमानी के रिश्तेदार जितेंद्र और ताऊ जसमेर ने बताया कि हिमानी ज्यादातर गांव में किसी विवाह व अन्य समारोह में शरीक होने के लिए आती थी। जब गांव के लोग उससे बात करते थे तो वह कहती थी कि वह पायलट बनकर गांव का नाम रोशन करेगी। उन्होंने बताया कि उनके परिवार व पूरे गांव में पहली बेटी थी, जो पायलट बनने की तैयारी कर रही थी। परिवार के लोगों पर हिमानी पर पूरा गर्व था।

हिमानी का जन्म गांव कुटेल में हुआ था। हिमानी के पिता गुरदयाल एयरफोर्स से रिटायर होने के बाद इंडिगो एयरलाइंस में मौसम विभाग में कार्यरत हैं और माता गृहणी हैं, जबकि उसका छोटा भाई तेजस्वी कल्याण दिल्ली के एक स्कूल में नॉन मेडिकल से ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ रहा है। पिता परिवार के साथ लगभग दो दशक से दिल्ली में रह रहा था, लेकिन उनके बड़े भाई जसमेर व कृपाल सिंह गांव कुटेल में ही रह रहे है।

हिमानी के चाचा प्रेम सिंह शाहपुर करनाल में सेंट्रल कॉपरेटिव बैंक के चेयरमैन रहे हैं। वे बताते हैं कि उसका भाई गुरदयाल एयरफोर्स के मौसम विभाग में तैनात रहे, इसी दौरान हिमानी अपने पिता के साथ रहती थी। वहां एयरफोर्स के जहाजों को उड़ता देखकर हिमानी ने अपने मन में भी खुद पायलट बनकर जहाज उड़ाने का सपना संजो लिया। पिता गुरदयाल ने भी अपनी बेटी हिमानी को पायलट बनाने के लिए उसके अंदर पूरा जोश भरा।

यही सपना संजोकर हिमानी ने दिल्ली के एक कॉलेज से बीटेक करने के बाद इंडिगो एयरलाइंस में कामर्शियल पायलट की ट्रेनिंग का पेपर दिया था, जोकि पहली बार में ही पास हो गया और उसने महाराष्ट्र के गोंदिया स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एविएशन ट्रेनिंग एंड मैनेजमेंट में दाखिला ले लिया। इसे राजीव गांधी नेशनल फ्लाइंग इंस्टीट्यूट के नाम से भी जाना जाता है। जहां हिमानी पिछले दो साल से ट्रेनिंग ले रही थी। 

कल्पना चावला को अपना आदर्श मानने वाली हिमानी ने 26 अप्रैल को सुबह 9 बजे अपने इंस्टीट्यूट से कामर्शियल पायलट बनने की अंतिम उड़ान भरी। दरअसल, इसके लिए 200 घंटे प्लेन उड़ाने का अनुभव होना जरूरी होता है। हिमानी 199 घंटे की ट्रेनिंग पूरी का चुकी थी। जबकि अंतिम घंटे की उड़ान के लिए हिमानी ने अपना विमान उड़ाया था।


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