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चर्चों में प्रभु यीशु का धूमधाम से मनाया गया जन्मदिन

-कही उपहार तो कही कराया गया भोज 
 
रायबरेली। जनपद में प्रभु यीशु का जन्मदिन क्रिसमस दिवस के रूप में मनाया गया। चर्चों में प्रार्थना की गयी। विश्वशांति देशशांति तथा जनकल्याण की भावना से प्रार्थना की गयी। शहर के नैथन इंग्लिस स्कूल परिषर में स्थित दुआ का घर में क्रिसमस दिवस पर प्रार्थना की गयी। प्रार्थना पास्टर धर्मेन्द्र ने कराईं। इस मौके पर बीसी नैथन, श्रीमती मीना नैथन प्रधानाचार्या, सुश्री प्रीता नैथन उप्रधानाचार्य, जयरी, ज्वैल नैथन सारा, जौसाबा, सन्ना, ज्योति, आकाष, प्रतिभा, सोनाली, बंदना, प्रिया, अनीसा, लाडली, सुभांसु, संजय, देवानन्द, राज कुमार , नीलू, सोनम, संगीता, नेहा, राजकुमारी, फूलमती, अतुल, अजय, आरती, बिमला, समेत बड़ी संख्या श्रद्धालु जन मौजूद रहे। इसके अतिरिक्त बस स्टेशन के निकट स्थित मेथोडिस्ट चर्च में प्रार्थना सभा की गयी । प्रार्थना के समय श्रद्धालुओं ने बड़ी श्रद्धा भक्ति के साथ प्रभु ईशा मसीह का संदेश सुना। इस अवसर पर नरेश पी सिंह , आईए सिंह, कैनी सोलोमन, विवेक सिंह, एफएम महन्त समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु जन मौजूद रहे।क्रिसमस एक ऐसा त्यौहार है जिसे शायद दुनिया के सर्वाधिक लोग पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। आज यह त्यौहार विदेशों में नहीं बल्कि भारत में भी समान जोश के साथ मनाया जाता है। भारत की विविधतापूर्ण संस्कृति के साथ क्रिसमस का त्यौहार भी पूरी तरह घुल-मिल गया है। सदियों से यह त्यौहार लोगों को खुशियां बांटता और प्रेम और सौहार्द की मिसाल कायम करता रहा है। यह त्यौहार हमारे सामाजिक परिवेश का प्रतिबिंब भी है, जो विभिन्न वर्गों के बीच भाईचारे को मजबूती देता आया है। क्रिसमस का अर्थ मानव मुक्ति और समानता है। बाइबिल के अनुसार, ईश्वर ने अपने भक्त याशायाह के माध्यम से 800 ईसा पूर्व ही यह भविष्यवाणी कर दी थी कि इस दुनिया में एक राजकुमार जन्म लेगा और उसका नाम इमेनुएल रखा जाएगा। इमेनुएल का अर्थ है ‘ईश्वर हमारे साथ‘। याशायाह की भविष्यवाणी सच साबित हुई और यीशु मसीह का जन्म इसी प्रकार हुआ। बालक यीशु के जन्म की सबसे पहली खबर इस दुनिया के सबसे निर्धन वर्ग के लोगों को मिली थी। वे कड़ी मेहनत करने वाले गड़रिये थे। सर्दी की रात जब उन्हें यह खबर मिली तो वे खुले आसमान के निचे खतरों से बेखबर सोती हुई अपनी भेड़ों की रखवाली कर रहे थे। एक तारा चमका और स्वर्ग-दूतों के दल ने गड़रियों को खबर दी कि तुम्हारे बीच एक ऐसे बालक ने जन्म लिया है, जो तुम्हारा राजा होगा। पूरी दुनिया के गरीब यह खबर सुनकर जहां खुश हुए, वहीं गरीबों पर जुल्म करने वाला राजा हेरोदेस नाराज हो गया। उसने अपने राज्य में 2 वर्ष की उम्र तक के सभी बच्चों को कत्ल करने का आदेश जारी कर दिया, ताकि उसकी सत्ता को भविष्य में किसी ऐसे राजा से खतरा न रहे। अच्छाई को देखकर बुराई करने वाले इसी तरह दुखी और नाराज होते हैं। यही शैतानियत का प्रतीक है। ईसा मसीह इसी शैतानियत को खत्म करने के लिए आए थे। ईसा मसीह ने मानव के रूप में जन्म लेने के लिए किसी संपन्न व्यक्ति का घर नहीं चुना। उन्होंने एक गरीब व्यक्ति के घर की गोशाला में घास पर जन्म लिया। दरअसल, वे गरीब, भोले-भाले और शोषित व पीड़ित लोगों का उद्धार करने आये थे। 
                                   ( कार्यक्रम प्रस्तुत करते बच्चे )

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