Login to your account

Username *
Password *
Remember Me

Create an account

Fields marked with an asterisk (*) are required.
Name *
Username *
Password *
Verify password *
Email *
Verify email *
Captcha *
Reload Captcha

भागवत कथा सप्ताह के सातवें दिन श्रीकृष्ण लीला का वर्णन

5 (1).jpg

-श्रीमद् भागवत कथा का भण्डारा आज

  एस के सोनी 

रायबरेली। टमकोरिया परिवार के गंगा देवी और सत्य नारायण टमकोरिया की स्मृति में षिवषंकर व दयाषंकर टमकोरिया द्वारा प्रभु टाउन मोहल्ले के पार्क में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह एवं ज्ञानयज्ञ के सातवें दिन मथुरा से पधारे कथावाचक पं. महेष कृष्ण उपाध्याय ने जहां भागवत कथा के महात्म्य का विषद वर्णन किया। वहीं लीलावतारी भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न रूपों का चित्रण किया, जिसे सुनकर भारी संख्या में मौजूद श्रोता भाव-विभोर हो उठे।

सातवें दिन की भागवत कथा में कथावाचक श्री उपाध्याय ने रूक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि रूक्म देष की राजकुमारी रूक्मिणी का यूं तो विवाह षिषुपाल नामक क्रूर राजा के साथ तय हो गया था लेकिन रूक्मिणी भगवान कृष्ण को चाहती थीं और रूक्मिणी के ही आमंत्रण पर श्रीकृष्ण ने षिषुपाल और रूक्म के दस हजार रक्षकां को परास्त करके रूक्मिणी का अपहरण किया और बाद में विवाह किया। यह श्री कृष्ण के पौरूष का प्रत्यक्ष उदाहरण रहा। कथावाचक ने कहा कि श्रीकृष्ण का रूप इस तरह लुभावना था कि षिषुपाल के सारे के सारे सैनिक मंत्रमुग्ध हो गये। उन्हांने कहा कि सच्चे प्यार और भक्ति से भगवान श्रीकृष्ण के दर्षन हो जाते हैं। चूं कि देवी रूक्मिणी श्रीकृष्ण को दिल और आत्मा से प्रेम करती थीं। इसलिए उन्हें भगवान के दर्षन प्राप्त हुए।

कथावाचक श्री उपाध्याय ने वह दृष्टान्त भी सुनाया जिसमें श्यमन्तक मणि को श्रीकृष्ण ने कैसे हासिल करके अपने ऊपर लगे आरोपां को समाप्त किया। कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि सत्राजित नामक व्यक्ति को किसी तरह से श्यमन्तक मणि प्राप्त हुई, उसने वह मणि सुरक्षा के लिए अपने भाई को सौंप दी। अचानक एक दिन षिकार के दौरान किसी सिंह ने उसके भाई को मारकर वह मणि हासिल की। तभी जामवन्त से उस सिंह का भीषण युद्ध हुआ और जामवन्त ने सिंह को मारकर मणि छीन ली। भाई के मृत शरीर को देखकर सत्राजित ने श्रीकृष्ण पर आरोप लगाया कि इन्हांने ही मेरे भाई को मारकर मणि हासिल कर ली। इस आरोप को समाप्त करने के लिए श्री कृष्ण सिंह के पद्चिन्हों के आधार पर जामवन्त की गुफा तक पहुंचे और वहां जामवन्त से भीषण युद्ध हुआ। बाद में जामवन्त ने माना कि यह तो मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम के अवतार है। अन्यथा इतना बड़ा युद्ध कोई दूसरा मुझसे नहीं कर सकता। जामवन्त ने प्रसन्न होकर न सिर्फ मणि लौटा दी बल्कि अपनी बेटी जाम्बवती का विवाह भी श्रीकृष्ण के साथ कर दिया। इसके बाद श्रीकृष्ण ने सत्यभामा समेत आठ राजकुमारियां के साथ विवाह किया।

---------------------------------


0
0
0
s2smodern
  1. Popular
  2. Trending