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गुजरात में देरी होने को लेकर चुनाव आयोग पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं

हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीख़ों की घोषणा हो जाने और गुजरात में देरी होने को लेकर चुनाव आयोग पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं.

सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को छोड़ कई पार्टियां गुजरात विधानसभा चुनाव में देरी को लेकर सवाल उठा रही हैं. इसे लेकर कई लोगों ने चुनाव आयोग की आलोचना की है. इन आलोचनाओं के बीच चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखा है.

बीबीसी गुजराती के संपादक अंकुर जैन को दिए इंटरव्यू में मुख्य चुनाव आयुक्त एके जोती ने कहा, ''चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है. गुजरात में बाढ़ आई है और इसमें 200 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं. अगर हम चुनाव की तारीख़ घोषित कर देते तो राहत-बचाव कार्य प्रभावित होते. तारीख़ घोषित होते ही आचार संहिता लागू हो जाती है.''

जोती ने कहा कि 27 सितंबर को गुजरात के मुख्य सचिव ने चुनाव आयोग को चिट्ठी भेजी थी. सरकार बाढ़ के कारण राहत और बचाव कार्यों को लेकर चिंतित थी. उत्तरी गुजरात के 45 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं. हमने इसे लेकर बात की. इसके साथ ही गुजरात में दिवाली एक बड़ा त्योहार होता है. गुजराती दिवाली और गुजराती नव वर्ष वहां के लोगों के लिए बेहद ख़ास है. ऐसे में हमने सोचा कि इन त्योहारों के ख़त्म होने के बाद ही चुवाव की तारीखें घोषित की जाएं

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