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प्रशांत का आरोप था कि ये सभी 21 विधायक लाभ के पद पर हैं,

 

 

नई दिल्ली. प्रेसिडेंट ने आम आदमी पार्टी (आप) के 21 MLA को पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी बनाए जाने के लिए लाए गए बिल को लौटा दिया है। केजरीवाल सरकार ने दिल्ली असेंबली में एक प्रपोजल पास किया था। इसमें इन विधायकों को पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी अप्वाइंट किए जाने पर लाभ का पद (ऑफिस ऑफ प्रोफिट) नहीं मानने की बात थी। बीजेपी और कांग्रेस ने इस पर एतराज जताया था। कहा था कि केजरीवाल अपने एमएलए को फायदा देने के लिए ऐसा कर रहे हैं। ईसी ने भी सफाई मांगी थी। खतरे में 'आप' के 21 MLA की मेंबरशिप...
- 21 आप एमएलए को पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी बनाए जाने के खिलाफ प्रशांत पटेल नाम के शख्स ने प्रेसिडेंट के पास एक पिटीशन फाइल की थी।
- प्रशांत का आरोप था कि ये सभी 21 विधायक लाभ के पद पर हैं, इसलिए इनकी मेंबरशिप रद्द की जानी चाहिए।
- प्रेसिडेंट ने पिटीशन इलेक्शन कमीशन को भेजी और कार्रवाई करने को कहा।
- जिसके बाद चुनाव आयोग ने आप के सभी 21 विधायको को मार्च में नोटिस भेजा था।
केजरीवाल ने किया पलटवार, बोले- मोदी लोकतंत्र का सम्मान नहीं करते

- केजरीवाल ने इस फैसला पर कड़ा एतराज जताया है।
- उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ''दिल्ली में हो रहे अच्छे कामों से मोदी जी घबरा रहे हैं।''
- ''एक MLA बेचारा रोज़ अपना पेट्रोल ख़र्च करके अस्पतालों के चक्कर लगाता था। बताओ क्या ग़लत करता था? मोदी जी ने उसको घर बिठा दिया।''
- ''एक MLA को बिजली पे लगा रखा था, एक को पानी पे, एक को अस्पतालों पे, एक को स्कूल पे। मोदी जी कहते हैं - ना काम करूँगा, ना करने दूँगा।''
- ''किसी MLA को एक पैसा नहीं दिया, कोई गाड़ी, बंगला- कुछ नहीं दिया। सब MLA फ़्री में काम कर रहे थे। मोदी जी कहते- सब घर बैठो, कोई काम नहीं करेगा।''
- ''मोदी जी लोक तंत्र का सम्मान नहीं करते। डरते हैं तो सिर्फ़ आम आदमी पार्टी से।''
इनकी मेंबरशिप खतरे में
प्रवीण कुमार, शरद कुमार, आदर्श शास्त्री, मदन लाल, शिव चरण गोयल, संजीव झा, सरिता सिंह, नरेश यादव, जरनैल सिंह , राजेश गुप्ता, राजेश ऋषि, अनिल कुमार वाजपेयी, सोम दत्त, अवतार सिंह कालका, विजेंद्र गर्ग विजय, जरनैल सिंह (रजौरी गार्डन), कैलाश गहलोत, अलका लांबा, मनोज कुमार, नितिन त्यागी और सुखवीर सिंह के नाम शामिल हैं।
EC ने क्या कहा था?
- EC (इलेक्शन कमीशन) ने MLA से पूछा था कि आपकी मेंबरशिप क्यों ना कैंसिल की जाए?
- EC ने आप विधायकों से 11 अप्रैल तक नोटिस का जवाब मांगा था।
- इसके बाद आप विधायकों ने 6 हफ्ते का टाइम और मांगा था।
- आप एमएलए ने अपने जवाब में कहा था कि वे पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी होने के नाते दिल्ली सरकार से कोई सैलरी, अलाउंस या ऐसी कोई दूसरी सुविधा नहीं ले रहे जो लाभ के पद के दायरे में आए।
- बता दें कि ऐसे ही मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी केजरीवाल सरकार को नोटिस भेज कर जवाब मांगा था।
कब बिल लाई थी सरकार?
- केजरीवाल ने दिल्ली में सरकार बनाने के कुछ दिन बाद ही आप के 21 MLA को पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी अप्वाइंट किया था।
- एमएलए को पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी बनाने के लिए 'आप' पिछले साल 24 जून को दिल्ली असेंबली में बिल लेकर आई थी।
- बिल को कानून मंत्री कपिल मिश्रा ने बिना बहस के पास कर दिया था।
- ऐसा करने के पीछे पार्टी का तर्क दिया था कि वह सरकार के कामकाज को बेहतर ढंग से चलाने के लिए ऐसा कर रही है।
- जून 2015 में दिल्ली असेंबली से पास हुए इस बिल को केंद्र सरकार से भी मंजूरी नहीं मिली है।


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