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विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण में भी अखिलेश को अहम भूमिका देने की मांग की.

 

शिवपाल सिंह यादव, मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव

लखनऊ में समाजवादी पार्टी दफ़्तर में मुलायम सिंह यादव की प्रेस कांफ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव समर्थकों ने जमकर हंगामा और नारेबाज़ी की.

इनमें ज़्यादातर युवा कार्यकर्ता थे और उन्होंने मांग की कि अखिलेश यादव को आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया जाए.

उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण में भी अखिलेश को अहम भूमिका देने की मांग की.

प्रेस कॉन्फ़्रेंस में मुलायम सिंह यादव ने दावा किया कि पार्टी में सब कुछ ठीक है. उन्होंने अपने भाई शिवपाल और बेटे अखिलेश के बीच भी किसी तरह के मतभेद की बात से इनकार किया लेकिन वहां अखिलेश के मौजूद न रहने से उनके समर्थकों में असंतोष फैल गया.

साथ ही मुलायम ने जिस तरह से शिवपाल और अमर सिंह का बचाव किया वो भी इऩ कार्यकर्ताओं के गले नहीं उतरा.

इन लोगों ने मुलायम के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी भी की और उन्हें राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दे डाली.

ऐसा कहा जा रहा है कि सोमवार से ही लगातार हो रही बैठकों के ज़रिए सुलह का रास्ता बनाने की कोशिशें हो रही थीं लेकिन रामगोपाल और उदयवीर समेत अपने समर्थकों की बर्ख़ास्तगी को रद्द कराने और चुनाव के दौरान टिकट वितरण में अहम भूमिका देने संबंधी अखिलेश यादव की मांग को ख़ारिज कर दिया गया.

यही नहीं, जानकारों का कहना है कि अखिलेश यादव अब किसी भी क़ीमत पर अमर सिंह को पार्टी से बाहर करने की शर्त पर ही कोई समझौता करेंगे जबकि नेताजी ये बात मानने को कतई तैयार नहीं है.

जानकार ये भी कहते हैं कि जब ख़ुद मुलायम सिंह यादव ये कह रहे हैं कि रामगोपाल की कोई हैसियत नहीं है और उनकी बातों का कोई महत्व नहीं है, तो इससे साफ़ पता चलता है कि वो ख़ुद सुलह समझौते के लिए कितने गंभीर हैं.

रामगोपाल यादव को अभी तक ख़ुद मुलायम सिंह यादव अपनी पार्टी का थिंक टैंक बताते रहे हैं और ये भी कहा जाता है कि उनके परिवार में रामगोपाल ही सबसे ज़्यादा पढ़े लिखे व्यक्ति हैं.

लखीमपुर खीरी से आए एक कार्यकर्ता दीपक यादव का कहना था कि पिछले डेढ़ महीने से चल रहे इस विवाद ने पार्टी को रसातल में पहुंचा दिया है और कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटने के कगार पर है.


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