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बड़ी खबर मच्छर काटने से हुई मौत तो मिलेगा दुर्घटना बीमा..जानिए कैसे

मच्छर काटने से हुई मौत तो मिलेगा दुर्घटना बीमा   : अब रेल या सड़क हादसा में हुई मौत सिर्फ दुर्घटना नहीं कहलाएगा. बल्कि अब यदि आपको मच्छर काट ले और आप बीमार पड़ गये  और इस बीमारी से जूझते हुए आपकी मौत हो गई तो यह एक दुर्घटना कहा जाएगा. सो, यदि आपने इंश्योरेंस कराया है तो आपको दुर्घटना बीमा अवश्य मिलेगा.मच्छर काटने से मलेरिया के चलते होने वाली मौत पर बीमा राशि देने से अब सरकारी और निजी क्षेत्र की इंश्योरेंस कंपनियां आनाकानी नहीं कर सकेंगी. इस बारे में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने एक अहम फैसला सुनाया है. उसने मच्छर काटने से हुई मौत को एक दुर्घटना करार दिया है.इस फैसले से जीवन बीमा कराने वाले लोगों के परिजनों को बड़ी राहत मिलेगी. आयोग के सदस्य जस्टिस वीके जैन ने उपरोक्त फैसला सुनाया. उन्होंने कहा, ‘हमें यह स्वीकार करने में कठिनाई हो रही है कि मच्छर काटने से हुई मौत को हादसे के चलते मौत नहीं माना जाएगा.’ बकौल जस्टिस जैन, ‘मच्छर का काटना कुछ वैसा ही है, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं रहती है, यह अचानक हो जाता है. इस कारण इससे हुई मौत एक हादसा है.’ आयोग ने यह फैसला पश्चिम बंगाल की मौसमी भट्टाचार्य द्वारा दाखिल दावा याचिका पर सुनाया. दरअसल, मौसमी के पति की मौत मच्छर के काटने से हो गई थी. मौसमी ने जनवरी, 2012 में अपने पति देबाशीष के मौत मामले में नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ दावा दाखिल कर रखा है. फैसले में जस्टिस जैन ने कहा, ‘इंश्योरेंस कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर सांप, कुत्ता काटने और ठंड लगने से हुई मौत को दुर्घटना माना गया है.लिहाजा इस दलील को माना नहीं जा सकता कि मच्छर के काटने से मलेरिया का होना एक रोग है, दुर्घटना नहीं.’ क्या है मामला याचिकाकर्ता मौसमी के पति देबाशीष ने बैंक ऑफ बड़ौदा से आवास ऋण लिया था. उन्होंने इसका बीमा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था. मौत होने की स्थिति में बीमा राशि प्रदान किए जाने की बात थी.जनवरी 2012 में देबाशीष की मौत हो जाने पर जब मौसमी ने बीमा कंपनी का दरवाजा खटखटा कर आवास ऋण की राशि खत्म कराने की गुजारिश की तो उसकी अर्जी ठुकरा दी गई. इसके खिलाफ 2014 में वह जिला उपभोक्ता अदालत गई. यहां बीमा कंपनी की ओर कहा गया कि देबाशीष की मौत किसी दुर्घटना नहीं बल्कि मच्छर काटने से हुई है. लेकिन अदालत ने मौसमी के पक्ष में निर्णय सुनाया. बीमा कंपनी फिर पश्चिम बंगाल उपभोक्ता आयोग पहुंची, लेकिन यहां भी उसकी अपील खारिज कर दी गई. अंत में यह मामला राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग पहुंचा. साभारImage result for mosquito


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