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दलितों के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी में बाग़ी सुर अपनाने वाली सांसद सावित्री बाई फुले बीते कुछ दिनों से चर्चा में हैं.

एक अप्रैल को लखनऊ में 'भारतीय संविधान बचाओ रैली' में फुले ने कहा था, ''कभी कहा जा रहा है कि संविधान बदलने के लिए आए हैं. कभी कहा जा रहा है कि आरक्षण को ख़त्म करेंगे. बाबा साहेब का संविधान सुरक्षित नहीं है."

अख़बारों, टीवी चैनलों और रेडियो के माध्यम से आपको पता चला होगा कि कभी संविधान बदलने की बातें होती हैं, कभी समीक्षा करने की तो कभी आरक्षण ख़त्म करने की.

अगर भारत का संविधान या आरक्षण ख़त्म हो जाएगा तो बहुजनों का अधिकार ख़त्म हो जाएगा.

अगर आज बहुजन समाज के लोग आईएएस, पुलिस, प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनने का सपना देख रहे हैं तो वो बाबा साहब के बनाए संविधान की वजह से देख रहे हैं.

मेरा कहना ये है कि दुनिया में भारत का संविधान बहुत अच्छा है. इसे पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए.

आज तक कई सरकारें आईं और गईं लेकिन भारत का संविधान पूरी तरह से लागू नहीं किया गया. इस वजह से पिछड़ी जाति के कितने ही लोग झुग्गी झोपड़ी में रहने और मैला ढोने को मजबूर हैं.

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भीमा कोरेगांव में हिंसा और उसके बाद शुरू हुए विवाद के बाद कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र की राजनीति नया मोड़ ले सकती है.

भीमा कोरेगांव में उस दिन जमा हुए आंबेडकर समर्थकों को सामाजिक-सांप्रदायिक हिंसा का सामना करना पड़ा.

इसके बाद तीन जनवरी को बुलाए गए महाराष्ट्र बंद में इसका असर भी दिखा.

घटना के ख़िलाफ़ संविधान निर्माता भीमराव आंबेडकर के पोते और भारिप बहुजन महासंघ (बीबीएम) के नेता प्रकाश आंबेडकर ने राज्यव्यापी बंद बुलाया था.

आंदोलन के बाद महाराष्ट्र के अलग-अलग कोनों से आ रही प्रतिक्रियाओं से लगता है कि प्रकाश आंबेडकर को न सिर्फ महाराष्ट्र, बल्कि पूरे देश में उभरते हुए दलित नेतृत्व के तौर पर देखा जा रहा है.

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कांग्रेस अध्यक्ष इराक में बंधक बनाये गये 39 भारतीयों की मौत पर स्तब्धता जताते हुए गहरा शोक व्यक्त किया है। उनकी पार्टी के नेता एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम आजाद ने कहा कि यह केवल पीड़ितों के परिजनों के लिए ही नहीं पूरे देश के लिए एक त्रासदी है।

राहुल ने ट्वीट कर कहा, ‘‘मैं यह सुनकर स्तब्ध हूं कि 2014 से इराक में बंधक बनाये गये गये 39 भारतीयों की मौत की पुष्टि हो गयी है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं उन परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं जो इस आशा के साथ जी रहे थे कि उनके प्रियजन सुरक्षित वापस लौटेंगे। मेरा दिल और दुआएं आप सभी के साथ हैं।’’

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चारा घोटाला के देवघर ट्रेजरी से जुड़े केस में शनिवार को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने सजा का एलान किया। 69 साल के लालू प्रसाद यादव को साढ़े तीन साल की जेल हुई। इसके अलावा कोर्ट ने उन पर 10 लाख का जुर्माना लगाया है। अगर वे जुर्माना नहीं देते तो उस स्थिति में उन्हें एक साल और जेल में रहना पड़ेगा। सभी 16 दोषियों ने रांची की बिरसा मुंडा जेल में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक साथ बैठकर जज शिवपाल सिंह का फैसला सुना। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कोर्ट ने उम्र का हवाला देते हुए राज्य सरकार से लालू समेत सभी दोषियों को हजारीबाग ओपन जेल भेजने की सिफारिश की है।

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इन्हें 3.5 साल जेल, 5 लाख जुर्माना

- लालू प्रसाद यादव, बिहार के पूर्व सीएम
- फूलचंद सिंह, पूर्व आईएएस ऑफिसर
- महेश प्रसाद, पूर्व आईएएस ऑफिसर
- बेक जूलियस, पूर्व आईएएस ऑफिसर
- सुनील कुमार सिन्हा, चारा सप्लायर
- सुशील कुमार सिन्हा, चारा सप्लायर
- राजा राम जोशी, चारा सप्लायर
- सुबीर भट्टाचार्य, वेटनरी डॉक्टर्स

- आरके राणा, पॉलिटिकल लीडर

- कृष्ण कुमार, सरकारी अफसर

 

इन्हें 7 साल जेल, 10 लाख जुर्माना
- जगदीश शर्मा, पॉलिटिकल लीडर
- सुनील गांधी, चारा सप्लायर
- त्रिपुरारी मोहन प्रसाद, चारा सप्लायर
- गोपीनाथ दास. चारा सप्लायर

- संजय अग्रवाल - 7 साल, चारा सप्लायर
- ज्योति कुमार झा - 7 साल, चारा सप्लायर

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लोकसभा में अलग अलग मुद्दों पर विभिन्न दलों के और सदस्यों की नारेबाजी के बीच कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गयी। बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरूआत से ही आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा, कावेरी, पीएनबी समेत कई अन्य मुद्दों पर विभिन्न दलों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही नहीं चल पा रही है।

 
एक बार के स्थगत के बाद 12 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सदन में व्यवस्था नहीं होने का हवाला देते हुए तेलुगू देशम पार्टी के टी नरसिंहन और वाईएसआर कांग्रेस के वाई बी सुब्बारेड्डी द्वारा सरकार के खिलाफ लाये गये अविश्वास प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में असमर्थता जताई। वहीं कांग्रेस, माकपा और राकांपा आदि दलों के सदस्यों की जोरदार नारेबाजी के चलते विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का पूरा बयान नहीं हो पाया । लोकसभा अध्यक्ष ने इस पर दुख प्रकट किया।
 
विदेश मंत्री इराक के मोसुल में 2015 में अपहृत किये गये 39 भारतीयों के मारे जाने के संबंध में एक बयान सदन में दे रहीं थीं। वह सुबह ही राज्यसभा में इस संबंध में वक्तव्य दे चुकी हैं। लेकिन हंगामा जारी रहने के कारण वह विस्तार से बयान नहीं दे सकीं और उन्होंने केवल इतना बताया कि 39 लोगों में से 38 के डीएनए नमूनों का मिलान होने के बाद उनके मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है और एक अन्य व्यक्ति के डीएनए नमूने का भी 70 प्रतिशत मिलान हो चुका है।
 
दोपहर 12 बजे सदन की बैठक शुरू हुई तो तेलंगाना राष्ट्र समिति के सदस्य ‘एक राष्ट्र एक नीति’ की अपनी मांग को लेकर नारेबाजी करते हुए आसन के पास आ गये, वहीं अन्नाद्रमुक के सदस्य आगे आकर कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन की मांग कर रहे थे। हंगामे के बीच ही अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आवश्यक कागजात सदन के पटल पर रखवाए और सभी सदस्यों से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बयान होने के कारण से व्यवस्था बनाने की अपील की। इस दौरान आसन के समीप खड़े टीआरएस और अन्नाद्रमुक के सदस्य तो शांत हो गये लेकिन इस पर कांग्रेस, माकपा, राकांपा और सपा समेत अन्य विपक्षी सदस्य हंगामा करने लगे।
 
सुषमा ने अपने बयान में कहा, ‘‘अब तक मैंने कहा था कि जब तक सबूत नहीं होंगे तब तक नहीं कहा जा सकता कि इराक में बंधक बनाये गये भारतीय मारे जा चुके हैं या नहीं। लेकिन आज मैं सबूत लेकर आई हूं। राज्यसभा में सभी सदस्यों ने सहयोग दिया और मैं यहां भी सदस्यों से सहयोग की अपेक्षा रखती हूं।’’ विदेश मंत्री ने सदस्यों से सहयोग की अपील की और कहा कि वह इस विषय पर शोर-शराबे में विस्तार से जानकारी नहीं दे सकेंगी लेकिन विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा।
 
सुषमा ने कहा कि इतना ही शोर-शराबा रहा तो मैं नहीं बोल पाऊंगी और इतना कहकर वह बैठ गयीं। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ने दुख प्रकट करते हुए कहा कि हम राजनीति में इतने संवेदनहीन हो गये हैं कि इस भावनात्मक विषय पर भी विदेश मंत्री की बात नहीं सुन सकते। इसके बाद उन्होंने सदन में व्यवस्था नहीं होने पर नरसिंहन और सुब्बारेड्डी द्वारा सरकार के खिलाफ लाये गये अविश्वास प्रस्ताव को आगे बढ़ा पाने में भी असमर्थता जताई।
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हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीख़ों की घोषणा हो जाने और गुजरात में देरी होने को लेकर चुनाव आयोग पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं.

सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को छोड़ कई पार्टियां गुजरात विधानसभा चुनाव में देरी को लेकर सवाल उठा रही हैं. इसे लेकर कई लोगों ने चुनाव आयोग की आलोचना की है. इन आलोचनाओं के बीच चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखा है.

बीबीसी गुजराती के संपादक अंकुर जैन को दिए इंटरव्यू में मुख्य चुनाव आयुक्त एके जोती ने कहा, ''चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है. गुजरात में बाढ़ आई है और इसमें 200 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं. अगर हम चुनाव की तारीख़ घोषित कर देते तो राहत-बचाव कार्य प्रभावित होते. तारीख़ घोषित होते ही आचार संहिता लागू हो जाती है.''

जोती ने कहा कि 27 सितंबर को गुजरात के मुख्य सचिव ने चुनाव आयोग को चिट्ठी भेजी थी. सरकार बाढ़ के कारण राहत और बचाव कार्यों को लेकर चिंतित थी. उत्तरी गुजरात के 45 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं. हमने इसे लेकर बात की. इसके साथ ही गुजरात में दिवाली एक बड़ा त्योहार होता है. गुजराती दिवाली और गुजराती नव वर्ष वहां के लोगों के लिए बेहद ख़ास है. ऐसे में हमने सोचा कि इन त्योहारों के ख़त्म होने के बाद ही चुवाव की तारीखें घोषित की जाएं

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे के दौरान भारतीय वायुसेना के विमान के

ये जानकारी सूचना के अधिकार के तहत सामने आई है.

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, एक्टिविस्ट कोमोडोर (रिटायर्ड) लोकेश बत्रा ने आरटीआई दायर की थी जिसके जवाब में उन्हें बताया गया है कि जून 2016 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 देशों के दौरे के लिए भारतीय वायुसेना का विमान इस्तेमाल किया है.

पाकिस्तान द्वारा दिए गए बिल में प्रधानमंत्री मोदी का 2015 के पाकिस्तान दौरे की एक छोटी यात्रा का भी शुल्क है जब वह रूस और अफ़ग़ानिस्तान दौरे से लौटने के दौरान लाहौर में पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति नवाज़ शरीफ़ से मिलने गए थे.

आरटीआई के मुताबिक़ उस यात्रा के दौरान भारत को पाकिस्तान ने 1.49 लाख रुपये का बिल दिया था.

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जानीमानी भारतीय शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी का कोलकाता में निधन हो गया है. वे 88 वर्ष की थीं.

सेनिया और बनारस घराने से संबंध रखने वाली गिरिजा देवी 'ठुमरी क्वीन' के नाम से मशहूर थीं.

संगीत और कला जगत से जुड़ी कई जानीमानी हस्तियों ने गिरिजा देवी के निधन पर शोक जताते हुए भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए इसे एक बड़ी क्षति बताया है.

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पंजाब नेशनल बैंक घोटाले मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं.

उन्होंने पूछा है कि प्रधानमंत्री इस घोटाले पर कुछ क्यों नहीं बोल रहे हैं?

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर देश के वित्तीय संस्थानों को बर्बाद करने के आरोप भी लगाए हैं.

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री ने इस देश की वित्तीय व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है. वो आम लोगों की जेब से पैसा निकालकर बैंकिंग सेक्टर में पहुंचा रहे हैं और अब उनके दोस्त और उद्योगपति इस पैसे को बैकिंग सेक्टर से चुरा रहे हैं."

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जदयू के भाजपा से हाथ मिलाने के साथ मैत्रीपूर्ण क्षेत्रीय दलों के समर्थन से राजग की संख्या राज्यसभा में बहुमत के काफी करीब पहुंच गयी है जिससे सरकार के विधायी एजेंडे को बढ़ावा मिलेगा। निर्दलीय एवं नामित सदस्यों के अलावा विभिन्न दलों के संख्या बल की गणना से पता चलता है कि मोदी सरकार संसद के 245 सदस्यीय ऊपरी सदन में कम से कम 121 सदस्यों से समर्थन की उम्मीद कर सकती है। सदन में समन्वय स्थापित करने वाले राजग नेताओं के चुस्त राजनीतिक प्रबंधन से उसे कांग्रेस नेतृत्व वाले विपक्ष की चुनौती से सफलतापूर्वक निपटने में मदद मिल सकती है क्योंकि कांग्रेस राज्यसभा में सरकार के विधेयकों को अवरूद्ध करने में अकसर सफल रही है।

नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली पार्टी के ऊपरी सदन में 10 सदस्य हैं जो अब तक सदन में अल्पमत में रहे सत्तापक्ष में महत्वपूर्ण इजाफा है।
कुल 26 सदस्यों वाले अन्नाद्रमुक, बीजद, टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और इनेलोद जैसे क्षेत्रीय दलों ने अकसर सरकार का समर्थन किया है और साथ ही सरकार आठ नामित सदस्यों में से कम से कम चार पर समर्थन के लिए निर्भर कर सकती है। इन सबको मिलाकर संख्या 121 होती है जो 123 के बहुमत के आंकड़े के बेहद करीब है। अगर भाजपा अगले वर्ष उत्तर प्रदेश के नौ में से आठ सीटें जीतती है तो मानसून सत्र के दौरान उसके मनोबल को बढ़ावा मिलेगा। इस समय उसके पास केवल एक सीट है। हालांकि बिहार में राजग की उल्टी गंगा बह सकती है जहां अगले साल मार्च-अप्रैल में छह सीटों के लिए चुनाव होंगे। इस समय जदयू और भाजपा के पास क्रमश: चार और दो सीटे हैं। राजद-कांग्रेस गठबंधन तीन तक सीटें जीत सकता है।
 
जदयू के समर्थन के साथ 245 सदस्यीय सदन में राजग का संख्या बल बढ़कर 89 हो गया। पार्टी के कुछ सदस्यों ने भाजपा से हाथ मिलाने के नीतीश के फैसले की आलोचना की है लेकिन यह साफ नहीं है कि क्या वह संसद में पार्टी के रूख के उलट काम करेंगे। अनिल माधव दवे के निधन से रिक्त हुई मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा की जीत तय होने तथा गुजरात में कांग्रेस से एक सीट छीनने के लिए उसके कोई कसर ना छोड़ने के साथ मौजूदा संसद सत्र के दौरान उसका संख्या बल बढ़कर 91 हो सकता है।
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