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मानव अधिकार हनन की घटनायें निरन्तर बढती जा रही हैं

आज देश में मानव अधिकार हनन की घटनायें निरन्तर बढती जा रही हैं जिनमें मानव उत्पीड़न, महिला उत्पीड़न, योन शोषण एवं बाल श्रम जैसी घटनायें प्रमुख हैं। जेल में बन्द क़ैदियों की स्थिति दयनीय एवं चिन्ताजनक है। देश में भ्रष्टाचार, सम्प्रदायिकता, जातिवाद, अलगाववाद, भाषावाद, प्रान्तवाद जैसी समस्याए दिन-प्रतिदिन विकराल रूप धारण करती जा रही है।

आज़ादी के 67 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज असंख्य भारत वासी बेहतर भोजन, शिक्षा, स्वास्थ, आवास शुद्ध पेय जल, न्याय समानता और विकास जैसी मूलभूत सुविधाओं से आज भी वंचित है।

हमारे संविधान में जाति, धर्म, वंश, मूल, लिंग, अमीरी-गरीबी, शिक्षित-अशिक्षित किसी भी प्रकार का विभेद नहीं किया गया है। संविधान में देश के प्रत्येक व्यक्ति को दैहिक, एवं प्राणित स्वतन्त्रता के अधिकार के साथ गरिमामय जीवन यापन करने की भावना निहित की गयी है। इसको व्यवहारिक रूप में लाने के लिये संविधान में विधायिका, न्यायपालिका एवं कार्यपालिका की व्यवस्था की गयी है। इसी आधार पर हमारे देश का संविधान विश्व का सर्वश्रेष्ठ संविधान माना जाता है।

परन्तु विडम्बना यह है कि इसका लाभ आम जनता को नहीं मिल पा रहा है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत वर्ष के प्रत्येक नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय मिल सका है। मोहल्लों के सफ़ाई नहीं होती, राशन की दुकानों पर वस्तुये सही से नहीं मिलती। सरकारी दफ्तरों में कुछ दिये बिना काम नहीं होता, अस्पतालों में दवायें नहीं मिलती, डाक्टर, नर्स मरीज़ों पर ध्यान नहीं देते, सड़के टूटी हैं, बिजली ठीक से मिलती नहीं,  


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