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1. जो लोग पेन के आख़िरी सिरे को चबाते है, वो ज्यादा क्रिएटिव होते हैं.

2. शनिवार की रात 7:26pm पर लोग सबसे ज्यादा खुश रहते हैं.

3. दुनिया में 100 साल से ज्यादा उम्र के लगभग 1,80,000 लोग हैं.

4. हिटलर अपनी भतीजी Angela Maria ‘Geli’ को अपने ऊपर मूत्र विसर्जन करने को कहता था.

 

5. नर खटमल, मादा खटमल से संभोग के लिए सीधा उसके पेट में छेद करके स्पर्म छोड़ देता हैं.

6. हंस हमेशा जोड़े में रहते है. इनमें से अगर एक की भी मौत हो जाए तो दूसरे के मरने की संभावना भी बढ़ जाती है. हंस सच्चे प्यार की मिसाल होते हैं.

7. अक्सर हम फेसबुक पर लोगो की फोटो देखकर उनके खुश होने का ज्यादा अनुमान लगा देते है, जिससे हम दुखी हो जाते हैं.

 

8. शिरडी से 60km की दूरी पर बसे शनि शिंगणापुर गांव में लोगो के घर बिना दरवाजों के हैं.

9. स्वर्ण मंदिर में एक दिन में 100000 लोगों को मुफ्त लंगर कराया जाता हैं.

10. शिमला को देश के सबसे जवाँ शहर माना जाता है क्योंकि यहाँ के 55% लोगों की उम्र 16 से 55 के बीच हैं.

11. दुनिया में केवल दो लोगो को कोका-कोला बनाने की विधि पता है. उन दोनों को एक साथ यात्रा करने की भी अनुमति नही हैं.

12. सोच को रोकना असंभव हैं.

 

13. मछली के सेवन से IQ लेवल में बढ़ोतरी होती हैं.

14. नींद भगाने के लिए सेब ‘काॅफी’ से ज्यादा असरदार होती हैं.

15. इंसान को मुसीबत के समय सलाह की बज़ाय प्यार की जरूरत होती है. बुरे वक्त में किसी को सहारा दें ज्यादा सलाहकार न बनें.

16. इंदिरा गांधी वितमंत्री का पद संभालने वाली इकलौती महिला थी.

17. धरती पर इंसान और डाॅलफ़िन्स 2 ऐसी प्रजातियाँ है जो अपने आनंद के लिए सेक्स का सहारा लेते हैं.

18. ड्रग लोर्ड, Pablo Escobar अपने पैसों को बांधने के लिए हर महीने $2500 रबर बैंड पर खर्च कर देता हैं.

19. अपना धन professions पर ना खर्च करके experiences पर खर्च करना ही खुशियों की चाबी हैं.

20. आपके पेट में एक acid तो ऐसा भी है जो रेजर ब्लेड को भी पचा जाएगा. इसका नाम है Hydrochloric acid.

21. सैंकडो साल पहले केरल में नीची जाति की महिलाओं के स्तन ढकने के लिए भी टैक्स देना पड़ता था.

22. केवल जाॅन नाम का अंग्रेज ही रानी लक्ष्मीबाई का चेहरा देख पाया था. इस अंग्रेज से रानी ने अपना केस लडवाया था.

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सलमान खान के रेप्ड वुमन वाले बयान का विरोध तेज हो गया है। मंगलवार को निर्भया की मां ने भी एक्टर के बयान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ''अगर वे (सलमान) निर्भया से मिले होते तो उन्हें पता चलता कि रेप विक्टिम की क्या हालत होती है।'' वहीं, एनसीपी की महिला विंग के मेंबर्स ने बांद्रा में सलमान के घर के बाहर विरोध किया। शिवसेना ने भी कहा कि सलमान को अपने बयान के लिए माफी मांगनी ही होगी। बता दें कि एक इंटरव्यू में एक्टर ने कहा था कि सुल्तान की शूटिंग के बाद वे रेप्ड वुमन जैसा फील करते थे।
- सलमान खान ने यह इंटरव्यू सोमवार को मुंबई में दिया।
- उन्होंने बताया- “ शूटिंग के दौरान उन छह घंटों में काफी मेहनत होती थी। वह मेरे लिए काफी मुश्किल था।“
- “ऐसा इसलिए कि मुझे 120 किलो के पहलवान को 10 अलग-अलग एंगल से उठाना होता था।“
- “कई बार तो उन्हें जमीन पर पटखनी देनी होती थी। रिंग में ऐसा एक बार नहीं, कई बार करना पड़ता था। ताकि रियल फाइट का फील आए।“
- “शॉट के बाद जब में रिंग से बाहर निकलता था, मुझे रेप का शिकार हुई महिला की तरह महसूस होता था। मैं सीधा नहीं चल पाता था।“
- "शूटिंग के बाद भी ट्रैनिंग सेशन के लिए जाना पड़ता था।" (पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
सलमान के बयान पर किसने क्या कहा?

- फिल्ममेकर सुभाष घई ने सलमान खान का सपोर्ट किया है।
- उन्होंने कहा, ''सलमान खान ने केवल एक उदाहरण दिया। इसका इस तरह से ट्रांसलेट किया जाना गलत है।''
- बीजेपी नेता शायना एनसी ने कहा, ''सलमान को माफी मांग लेनी चाहिए। हो सकता है कि जुबान फिसलने के कारण उन्होंने ऐसा कह दिया हो। ''
- ''हालांकि, कोई इसे उपमा के तौर पर इस्तेमाल नहीं कर सकता। इसका कोई औचित्य नहीं है।''
- वुमन एक्टिविस्ट कविता कृष्णन ने कहा, ‘'जब सलमान कहते हैं तो बहस होती है। लेकिन फिल्म थ्री इडियट्स में भी बलात्कार को लेकर मजाक उड़ाया गया था। इसका मजाक बनाया जाना बंद किया जाना चाहिए।''
सलीम ने कहा- सलमान का कहना गलत था पर इरादा नहीं
- सलमान खान के पिता सलीम खान ने ट्वीट कर बेटे का बचाव किया।
- उन्होंने कहा, ''बेशक सलमान ने जो कहा, वह गलत था। तुलना, उदाहरण और संदर्भ भी, मगर उनका इरादा गलत नहीं था। फिर भी, मैं फैमिली, फैन्स और उनके करीबी दोस्तों की ओर से माफी मांगता हूं।''

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भाग्यशाली है इन वर्षो में जन्मे लोग!आपका वर्ष है क्या ?

1. “Bluetooth” का नाम डेनमार्क के दूसरे राजा ‘Hernald Bluetooth’ के नाम पर रखा गया है.

2. इंग्लिश अल्फाबेट में शामिल होने वाला आखिरी अक्षर Z नही बल्कि J हैं.

3. अमेरिका में रेप करने वाले 97% अपराधी ऐसे है जिन्होनें अपनी जिंदगी का एक दिन भी जेल में नही बिताया.

4. 1985 से पहले, डाॅक्टरों का मानना था कि बच्चों को दर्द नही होता. इसलिए वो उन्हें बिना सुन्न किए ही सर्जरी कर देते थे.

 

5. 99% प्रजाति ऐसी है, जो कभी न कभी धरती पर जिंदा थी लेकिन आज विलुप्त हो चुकी है.

6. सोलर सिस्टम में केवल धरती ही ऐसी जगह है जहाँ सब तरह के ग्रहण लगते है.

7. ‘Starfish’ अपनी बाजुओं को दोबारा उगा लेती है. एक तथ्य ये भी है कि ये केवल अपनी बाजु से ही पूरा शरीर भी उगा सकती है.

 

8. ‘Bubble Wrap’ असल में wallpaper के रूप में प्रयोग करने के लिए डिजाइन किए गए थे.

9. आपके नाखून आपके दादा-दादी की तुलना में 25% तेजी से बढ़ रहे है.

10. यूरेनस ग्रह पर गर्मी का सीजन 42 साल तक चलता है.

11. दुनिया की सबसे बड़ी लिमोजिन की लंबाई 100ft है. जो एक रेल के डिब्बे से भी लंबी है.

12. जागिंग को लोकप्रिय बनाने वाले आदमी का नाम था ‘Jim Fixx’. इनकी मौत दौड़ते समय हार्ट अटैक आने की वजह से हुई थी.

 

13. पुरूषों की तुलना में, महिलाएँ एक साथ ज्यादा काम कर सकती है. महिलाएँ मल्टी टास्कर होती है।

14. दुनिया के 80% बादाम अमेरिका के राज्य कैलिफोर्निया में उगाए जाते है.

15. ‘Gadsby’ एक 50,000 शब्दों का नाॅवेल है. इसकी खासियत है कि ये बिना E लैटर्स के लिखा गया है.

16. छींकते समय हमारे मुँह से थूक की करीब 40,000 छींटे निकलती है.

17. शकीरा को एक बार स्कूल में अध्यापकों ने ये कहते हुए रिजेक्ट कर दिया था कि तुम्हारी आवाज बकरी जैसी है.

18. पहले विश्वयुद्ध के बाद जर्मनो में पुरूषों की संख्या बहुत कम हो गई थी. हालात ये थे कि 3 महिलाओं में से केवल 1 को ही पति मिल रहा था.

19. 2004 में, सैमसंग ने android में पैसे लगाने से मना कर दिया था क्योंकि उसको इसमें फायदा नजर नही आया. लेकिन आज android क्या चीज है आप जानते ही हो.

20. 2034 तक, दुनिया की 47% नौकरी कंप्यूटर खुद ही करने लगेगे.

21. एक चम्मच पानी में 500,000,000,000,000,000,000,000 एटम होते है.

22. अखबारों में आने वाला crossword सबसे पहले ब्रिटेन के न्यूजपेपर में सन् 1924 में छपा था.

23. अमेरिका में Domino’s pizza की डिलिवरी करने वाले सभी ड्राइवर्स एक हफ्ते में इतना ट्रैवल कर लेते है कि 41 बार चाँद पर आया-जाया जा सके.

24. गर्म पेय पदार्थों का स्वाद कप के कलर के अनुसार बदल जाता है.

25. ऐतिहासिक तथ्य: जिन लोगो का जन्म 1996 से 1999 के बीच हुआ है वो 3 decades (मतलब, 10 सालों का समूह), 2 century (मतलब, 100 सालों का समूह), 2 millennium (मतलब, 1000 सालों का समूह) में जी चुके है और उन्होनें ये काम 18 साल का होने से पहले कर लिया है. ये अपने आप में एक रिकाॅर्ड है आप अपने बड़े या छोटों को ये रिकाॅर्ड बता सकते हो. और मैं खुद भी इन लोगों में शामिल हूँ. मेरा जन्म 1997 का है.

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ऐक्ट्रेस हुमा कुरैशी पिछले काफी समय से रुपहले पर्दे से दूर हैं। वहीं उनकी पिछली फिल्म 'एक्स: पास्ट इज प्रेजेंट' भी बड़े पर्दे पर कोई कमाल नहीं दिखा पाई। मगर हुमा का मानना है कि बुरा वक्त भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है जितना कि अच्छा समय होता है।
हुमा कहती हैं, 'मुझे लगता है कि बुरा समय बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। कई बार तो अच्छे समय से भी ज्यादा महत्वूपूर्ण। जैसा कि कहा गया है कि जीतना जितना इंपॉर्टेंट है, हारना भी उतनी ही अहमियत रखता है। इससे आप खुद को एक बार फिर गिरकर उठना सीखते हैं। इससे आप ज्यादा कड़ी मेहनत करके ज्यादा बड़ी अचीवमेंट हासिल करने में यकीन रखते हैं।'

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लखनऊ को प्राचीन काल में लक्ष्मणपुर और लखनपुर के नाम से जाना जाता था। कहा जाता है कि अयोध्या के राम ने लक्ष्मण को लखनऊ भेंट किया था। लखनऊ के वर्तमान स्वरूप की स्थापना नवाब आसफउद्दौला ने 1775 ई.में की थी। अवध के शासकों ने लखनऊ को अपनी राजधानी बनाकर इसे समृद्ध किया। लेकिन बाद के नवाब विलासी और निकम्मे साबित हुए। आगे चलकर लॉर्ड डलहौली ने अवध का अधिग्रहण कर ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया। 1850 में अवध के अन्तिम नवाब वाजिद अली शाह ने ब्रिटिश अधीनता स्वीकार कर ली।

नवाबकाल

1775 में अवध के चौथे नवाब असिफुद्दोला या अशफ - उद - दुलाह ने अवध की राजधानी को फ़ैज़ाबाद से लखनऊ स्थानांतरित किया था। वास्तुकला की दृष्टि से अवध के नवाबों का इस शहर में काफी योगदान है, इसके अलावा उस समय के लखनऊ की मुग़ल चित्रकारी भी आज बहुत से संग्रहालय में सुरक्षित हैं। भवनों के स्तर पर बड़ा इमामबाड़ाछोटा इमामबाड़ा, तथा रूमी दरवाज़ा मुग़ल वास्तुकला का जीता जागता उदाहरण है। हालाँकि आधुनिक प्रशासन की उपेक्षा से इन महत्त्वपूर्ण विरासतो का खंडहरों में तब्दील होने का खतरा उपस्थित हो गया है।

प्राचीन अवध राज्य का विलय ब्रिटिश साम्राज्य में 1857 के सिपाही विद्रोह के फलस्वरुप हुआ था। यह शहर भारत के इस पहले व्यवस्थित स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सबसे पहले जीते गये कुछ शहरों में से था। ब्रिटिश शासकों को यह शहर अपने कब्ज़े में लेने के लिये काफी मशक्कत करनी पड़ी। लखनऊ का "शहीद स्मारक" आज भी हमें उन क्रांतिकारियों की याद ताज़ा कराता है।

लखनऊ के आधुनिक वास्तुकारी में लखनऊ विधानसभा और चारबाग़ स्थित लखनऊ रेलवे स्टेशन का नाम लिया जा सकता है। विश्व के सबसे पुराने आधुनिक स्कूलों में से एक ला मार्टीनियर कॉलेज भी इस शहर में मौजूद है जिसकी स्थापना ब्रिटिश शासक क्लाउड मार्टिन की याद में की गयी थी।

अहमद शाह अब्दाली के दिल्ली पर हमले के बाद शायर मीर तकी "मीर" अवध के चौथे नवाब अशफ - उद - दुलाह या असफ़ुद्दौला के दरबार में लखनऊ चले आये थे और अपनी जिन्दगी के बाकी दिन उन्होने यहीं गुजारे थे और 20 सितम्बर 1810 को यहीं उनका निधन हुआ।

सन १९०२ में नार्थ वेस्ट प्रोविन्स का नाम बदल कर यूनाइटिड प्रोविन्स ऑफ आगरा एण्ड अवध कर दिया गया। साधारण बोलचाल की भाषा में इसे यूपी कहा गया। सन १९२० में प्रदेश की राजधानी को इलाहाबाद से लखनऊ कर दिया गया। प्रदेश का उच्च न्यायालय इलाहाबाद ही बना रहा और् लखनऊ में उच्च न्यायालय की एक् न्यायपीठ स्थापित की गयी। स्वतन्त्रता के बाद १२ जनवरी सन १९५० में इस क्षेत्र का नाम बदल कर उत्तर प्रदेश रख दिया गया और लखनऊ इसकी राजधानी बना। गोविंद वल्लभ पंत इस प्रदेश के प्रथम मुख्य मन्त्री बने। अक्टूबर १९६३ में सुचेता कृपलानी उत्तर प्रदेश एवम भारत की प्रथम महिला मुख्य मन्त्री बनी।

लखनऊ के सांसद श्री अटल बिहारी वाजपेयी दो बार, मई 16, 1996 से June 1, 1996 तक और फिर मार्च 19, 1998 से मई 22, 2004 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे हैं।

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दुनियाभर में बॉक्सिंग की पहचान बनने वाले बॉक्सर मुहम्मद अली अब इस दुनिया में नहीं हैं। दुनियाभर में अपने पंच की ताकत से धाक जमाने वाले अली के जाने से दुनियाभर में उनके चाहने वाले रंज कर रहे हैं। भारत में अली की लोकप्रियता किसी से छुपी नहीं है लेकिन खास बात ये है कि बॉलीवुड कलाकारों की पूरी जमात में वो भारत के अपने समकालीन कई खिलाडियों से कहीं ज्यादा मशहूर रहे हैं। मुहम्मद अली के चाहने वालों में एक नाम अमिताभ बच्चन का भी है। अमिताभ इस महान बॉक्सर के दुनिया छोड़ जाने से बेहद दुखी हैं।
अमिताभ बच्चन का कहना है कि अली जैसे विरले कभी-कभी पैदा होते हैं, वो सिर्फ रिंग में ही आक्रामक नहीं थे बल्कि रिंग के बाहर भी उन्होंने कई बुराईयों के खिलाफ लड़ाईयां लड़ीं। अमिताभ ने ट्विटर पर मुहम्मद अली के साथ अपनी मुलाकात और वो कहानी याद की है जब वो अली के साथ पर्दे पर दिखने की तैयारी करने लगे थे।

अमिताभ बच्चन ने उन दिनों के याद किया है, जब वो और निर्माता-निर्देशक प्रकाश मेहरा अली के लॉस एंजिल्स स्थित घर पर रुके थे। इस दौरान अली के साथ की तस्वीरें भी उन्होंने साझा की हैं। अमिताभ ने ट्विटर के जरिए याद किया है कि प्रकाश मेहरा ने उनको और मुहम्मद अली को लेकर एक फिल्म बनाने का वादा इस दौरान किया था। जिसने उन्हें मुहम्मद अली के साथ पर्दा साझा करने का सपना दे दिया लेकिन ये सपना अधूरा ही रह गया। प्रकाश मेहरा का अमिताभ और अली को लेकर फिल्म बनाने का ख्वाब कभी परवान ना चढ़ सका।

अमिताभ और मुहम्मद अली एक फिल्म में होते तो बहुत मुमकिन है कि दोनों बॉक्सिंग करते पर्दे पर दिखते। मुहम्मद अली किसी हिन्दी गाने पर डांस करते भी दिखते और हीरोइन के आगे-पीछे चक्कर लगाते भी। अब ये सिर्फ सोचा जा सकता है क्योंकि अब मुहम्मद अली सिर्फ यादों में रह गए हैं।

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मुसीबते हमारी ज़िंदगी की एक सच्चाई है। कोई इस बात को समझ लेता है तो कोई पूरी ज़िंदगी इसका रोना रोता है। ज़िंदगी के हर मोड़ पर हमारा सामना मुसीबतों(problems) से होता है. इसके बिना ज़िंदगी की कल्पना नहीं की जा सकती।
अक्सर हमारे सामने मुसीबते आती है तो तो हम उनके सामने पस्त हो जाते है। उस समय हमे कुछ समझ नहीं आता की क्या सही है और क्या गलत। हर व्यक्ति का परिस्थितियो को देखने का नज़रिया अलग अलग होता है। कई बार हमारी ज़िंदगी मे मुसीबतों का पहाड़ टूट पढ़ता है। उस कठिन समय मे कुछ लोग टूट जाते है तो कुछ संभाल जाते है।
मनोविज्ञान के अनुसार इंसान किसी भी problem को दो तरीको से देखता है;
1 problem पर focus करके(problem focus peoples)
2 solution पर focus करके(solution focus peoples)
Problem focus peoples अक्सर मुसीबतों मे ढेर हो जाते है। इस तरीके के इंसान किसी भी मुसीबत मे उसके हल के बजाये उस मुसीबत के बारे मे ज्यादा सोचते है। वही दूसरी ओर solution focus peoples मुसीबतों मे उसके हल के बारे मे ज्यादा सोचते है। इस तरह के इंसान मुसीबतों का डट के सामना करते है।

 

 

दोस्तो आज मै आपके साथ एक महान solution focus इंसान की कहानी शेयर करने जा रहा हु जो आपको किसी भी मुसीबत से लड़ने के लिए प्रोत्साहित (motivate) करेगी। दोस्तो आपने नेपोलियन बोनापार्ट (napoleon Bonaparte) का नाम तो सुना ही होगा। जी हा वही नापोलियन बोनापार्ट जो फ़्रांस के एक महान निडर और साहसी शासक थे जिनके जीवन मे असंभव नाम का कोई शब्द नहीं था। इतिहास में नेपोलियन को विश्व के सबसे महान और अजय सेनापतियों में से एक गिना जाता है। वह इतिहास के सबसे महान विजेताओं में से माने जाते थे । उसके सामने कोई रुक नहीं पाता था।

 

नेपोलियन के बुलंद होसलों की कहानी- 

नेपोलियन अक्सर जोखिम (risky) भरे काम किया करते थे। एक बार उन्होने आलपास पर्वत को पार करने का ऐलान किया और अपनी सेना के साथ चल पढे। सामने एक विशाल और गगनचुम्बी पहाड़ खड़ा था जिसपर चढ़ाई करने असंभव था। उसकी सेना मे अचानक हलचल की स्थिति पैदा हो गई। फिर भी उसने अपनी सेना को चढ़ाई का आदेश दिया। पास मे ही एक बुजुर्ग औरत खड़ी थी। उसने जैसे ही यह सुना वो उसके पास आकर बोले की क्यो मरना चाहते हो। यहा जितने भी लोग आये है वो मुह की खाकर यही रहे गये। अगर अपनी ज़िंदगी से प्यार है तो वापिस चले जाओ। उस औरत की यह बात सुनकर नेपोलियन नाराज़ होने की बजाये प्रेरित हो गया और झट से हीरो का हार उतारकर उस बुजुर्ग महिला को पहना दिया और फिर बोले; आपने मेरा उत्साह दोगुना कर दिया और मुझे प्रेरित किया है। लेकिन अगर मै जिंदा बचा तो आप मेरी जय-जयकार करना। उस औरत ने नेपोलियन की बात सुनकर कहा- तुम पहले इंसान हो जो मेरी बात सुनकर हताश और निराश नहीं हुए। ‘ जो करने या मरने ‘ और मुसीबतों का सामना करने का इरादा रखते है, वह लोग कभी नही हारते।
आज सचिन तेंदुलकर (sachin tendulkar) को इसलिए क्रिकेट (cricket) का भगवान कहा जाता है क्योकि उन्होने जरूरत के समय ही अपना शानदार खेल दिखाया और भारतीय टीम को मुसीबतों से उभारा। ऐसा नहीं है कि यह मुसीबते हम जैसे लोगो के सामने ही आती है, भगवान राम के सामने भी मुसीबते आयी है। विवाह के बाद, वनवास की मुसीबत। उन्होने सभी मुसीबतों का सामना आदर्श तरीके से किया। तभी वो मर्यादा पुरषोतम कहलाये जाते है। मुसीबते ही हमें आदर्श बनाती है।

 

अंत मे एक बात हमेशा याद रखिये;
जिंदगी में मुसीबते चाय के कप में जमी मलाई की तरह है,
और कामयाब वो लोग हैं जिन्हेप फूँक मार के मलाई को साइड कर चाय पीना आता है

 

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बॉलीवुड में सिक्का जमाने के लिए कोई 'गॉडफ़ादर' होना ज़रूरी माना जाता है.
लेकिन अगर माता-पिता फ़िल्म इंडस्ट्री से हैं तो करियर की राह थोड़ी आसान हो जाती है.
हालांकि बॉलीवुड में कई ऐसे अभिनेता भी हैं जिनके माता-पिता फ़िल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी हस्ती हैं लेकिन उनके बच्चों को वही कामयाबी नसीब ना हो सकी.
अभिषेक बच्चन अभिनेता अमिताभ बच्चन के बेटे अभिषेक बच्चन ने साल 2000 में जेपी दत्ता की फ़िल्म 'रिफ़्यूजी' से करियर शुरू किया था.
इस फ़िल्म का बॉक्स ऑफ़िस पर बुरा हाल रहा. एक हिट फ़िल्म के लिए अभिषेक बच्चन को क़रीब चार साल इंतज़ार करना पड़ा.
इस दौरान उनकी 14 फ़िल्में फ्लॉप रहीं. साल 2004 में आई मणिरत्नम की फ़िल्म 'युवा' अभिषेक बच्चन की पहली हिट फ़िल्म थी.
इसके बाद उनकी 'बंटी और बबली', 'गुरू', 'धूम' और 'सरकार' जैसी चंद फ़िल्मों को ही सफलता मिली लेकिन अभिषेक अपने पिता जैसी शोहरत के नज़दीक भी नहीं पहुंच पाए.
बॉबी देओल अपने जमाने के एक्शन स्टार धर्मेंद्र के बड़े बेटे सनी देओल ने फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई लेकिन छोटे बेटे बॉबी देओल उम्मीद के मुताबिक मुकाम हासिल नहीं कर सके.
साल 1995 में करियर शुरू करने वाले वाले बॉबी देओल करीब 41 फ़िल्मों में काम कर चुके हैं.
इनमें से 'गुप्त', 'सोल्जर', 'बादल', 'हमराज़' और 'दोस्ताना' जैसी फ़िल्मों को ही कामयाबी मिल सकी.
मशहूर अभिनेता जीतेंद्र की बेटी एकता कपूर ने बतौर निर्माता टीवी और फ़िल्मों में अपना सिक्का जमाया लेकिन उनके बेटे तुषार कपूर अभिनेता के तौर पर ख़ास पहचान नहीं बना सके हैं.
अपनी भारी भरकम आवाज़ से लोगों को 'खामोश' करने वाले अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा ने साल 2010 में फ़िल्म 'सदियां' में काम किया.
ये फ़िल्म ना समीक्षकों को पसंद आई और ना ही दर्शकों को.
सदाबहार अभिनेता देवानंद के बेटे सुनील आनंद ने 80 के दशक में 'आनंद ही आनंद', 'कार थीफ़' और 'मैं तेरे लिए' जैसी फ़िल्मों के ज़रिए बॉलीवुड में अपना सिक्का जमाने की कोशिश की लेकिन हर बार मुँह के बल गिरे.
उन्होंने साल 2001 में फ़िल्म 'मास्टर' से बॉलीवुड में निर्देशक के तौर पर दूसरी पारी शुरू करनी चाही पर इसमें भी नाकाम रहे.
'डिस्को डांसर' मिथुन चक्रवर्ती के बेटे महाअक्षय चक्रवर्ती ने साल 2008 की फ़िल्म 'जिम्मी' से बॉलीवुड में क़दम रखा.
फ़िल्म ना तो समीक्षकों को रास आई और ना ही दर्शकों को भायी. महाअक्षय आज भी अपने पिता से अलग पहचान बनाने की कोशिश में लगे हैं.
'क़ुर्बानी', 'धर्मात्मा', 'जाँबाज़' जैसी ज़बरदस्त फ़िल्में बनाने वाले अभिनेता और निर्माता-निर्देशक फ़िरोज़ ख़ान ने इकलौते बेटे फ़रदीन ख़ान को 'प्रेम अगन' फ़िल्म से लांच किया.
फ़रदीन ने राम गोपाल वर्मा की कुछ फ़िल्मों में काम किया जिन्हें सफलता भी मिली लेकिन पिता की मौत के बाद उनके फ़िल्मी सफ़र पर विराम सा लग गया.

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'ब्लैक' के बाद बॉलीवुड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी बड़े पर्दे पर वापसी करने के लिए तैयार हैं, अब रानी इस फिल्म में भी दर्शकों को अपनी एक्टिंग से हैरान करने वाली हैं।  यशराज बैनर तले बन रही फिल्म 'हिचकी' फिल्म को सिद्धार्थ पी मल्होत्रा ने डायरेक्ट किया है। टीम ने शूटिंग खत्म होने के बाद ट्विटर पर एक तस्वीर शेयर की है।  'हिचकी' की शूटिंग अप्रैल में शुरू हुई थी और अब ये पूरी हो गई है। रानी फिल्म में दिव्यांग के किरदार में नजर आएंगी।

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सलमान ख़ान की आने वाली फ़िल्म 'बजरंगी भाईजान' का ट्रेलर गुरुवार को लाँच कर दिया गया.
इस मौके पर सलमान ख़ान, करीना कपूर और नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के साथ निर्देशक कबीर ख़ान भी मौजूद थे.
ईद पर रिलीज़ होने वाली फ़िल्म का गाना 'सेल्फ़ी ले ले' पहले ही सुर्खियां बटोर चुका है.
सलमान का पहला प्रॉडक्शन-सलमान ख़ान ने अपने प्रोडक्शन हाउस की पहली फ़िल्म के बारे में कहा, "मुझे प्रोड्यूसर बन कर काफ़ी अच्छा लग रहा है और मैं चाहता हूँ कि फिल्म अच्छी कमाई करे."
उनके भाई अरबाज़ औऱ सोहेल का प्रोडक्शन हाउस होने के बावजूद अलग प्रोडक्शन हाउस शुरू करने के सवाल पर सलमान बोले, "अरबाज़ और सोहेल के बच्चे हैं."
जब पूछा गया कि आपके तो बच्चे नहीं हैं, तो उन्होंने कहा, "पहला प्रोडक्शन तो रख ही दिया है, ईंशाअल्लाह बच्चों की भी लाइन लगा देंगे."

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